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पटना से चोरी हुई मूर्ति बरामद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पटना संग्रहालय से पिछले महीने चोरी चली गई पुरातात्विक महत्व की दुर्लभ और बहुमूल्य बुद्ध मूर्तियों में से एक मूर्ति पुलिस ने वाराणसी शहर से बरामद की है. पुलिस ने इस सिलसिले में मंगलवार को पाँच तस्करों को भी गिरफ्तार किया है. ये तस्कर एक स्थानीय दुकानदार से इस मूर्ति का सौदा करने की फ़िराक में थे, लेकिन दुकानदार ने इसकी सूचना पुलिस को दे दी. बरामद मूर्ति आठवीं शताब्दी की है. कांसे और अष्टधातु की बनी इस मूर्ति की लंबाई साढ़े 17 सेंटीमीटर है और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इसकी कीमत पाँच करोड़ रुपए आँकी जा रही है. पुलिस पूछताछ में तस्करों ने स्वीकार किया है कि एक मूर्ति वह पहले ही ढाई लाख रूपए में बेच चुके हैं. वाराणसी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आशुतोष पांडे ने कहा कि मूर्ति तस्कर गिरोह का सरगना बिहार का रहने वाला है और पकडे़ गए तस्करों से पूछताछ के आधार पर एक पुलिस दल शीघ्र ही बिहार भेजा जाएगा. उन्होंने दावा किया कि पटना संग्रहालय से चोरी गई अन्य मूर्तियाँ भी जल्द ही बरामद कर ली जाएँगी. 24 सितंबर तक मूर्तियाँ पटना संग्रहालय में सुरक्षित थीं, लेकिन जब दो दिन बाद संग्रहालय खुला तो मूर्तियाँ गायब थी. बारह सौ साल पुरानी इन मूर्तियों की चोरी से सरकारी हलकों में खलबली मच गई थी. बिहार सरकार ने इस चोरी के बाद इंटरपोल को इसकी सूचना देकर सतर्क कर दिया था और चोरी की जाँच केन्द्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई को सौंप दी थी. | इससे जुड़ी ख़बरें टैगोर के नोबेल पदक की प्रतिकृति सौंपी07 मई, 2005 | भारत और पड़ोस जिम कॉर्बेट का घर बिकाऊ 19 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस रेसीडेंसी संग्रहालय में एक नई गैलरी16 अगस्त, 2004 | भारत और पड़ोस नोबेल पदक चोरी की जाँच सीबीआई को28 मार्च, 2004 | भारत और पड़ोस रबीन्द्रनाथ टैगोर का नोबेल पदक चोरी25 मार्च, 2004 | भारत और पड़ोस 'पटकथा चोरी की है' | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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