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रेसीडेंसी संग्रहालय में एक नई गैलरी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय पुरातत्व विभाग ने लखनऊ के ऐतिहासिक रेसीडेंसी संग्रहालय में एक नई गैलरी शुरु की है जिसमें उन चीज़ों को रखा गया है जो इस परिसर में ताज़ा खुदाई के बाद मिली हैं. ये सारी चीज़ें ब्रितानी शासन काल की हैं. ब्रितानी शासन के खिलाफ़ 1857 में हुए पहले भारतीय सशस्त्र विद्रोह की स्मृति में बनाए गए इस संग्रहालय में इस गैलरी की स्थापना से एक आकर्षण और बढ़ गया है. उस विद्रोह में रेसीडेंसी की इमारत को बड़ी क्षति पहुँची थी. इस परिसर से ब्रितानी अधिकारियों की बहुत सी वस्तुएँ मिली हैं और इससे भारत में ब्रितानी शासकों की जीवन शैली का अंदाज़ा होता है. रेसीडेंसी
गोमती नदी के किनारे रेसीडेंसी का निर्माण वर्ष 1800 में तत्कालीन नवाब ने उस समय के ब्रितानी मुख्य कमीश्नर के लिए करवाया था. जून 1857 में हुए सशस्त्र संघर्ष में लखनऊ में ब्रितानी फ़ौजों को हार का सामना करना पड़ा था और उन्होंने रेसीडेंसी की शरण ली थी. पाँच महीने तक इस इमारत को घेरे रखा गया और लगातार गोलीबारी होती रही. इस गोलीबारी में इमारत को बड़ी क्षति पहुँची और इमारत का एक हिस्सा तो ध्वस्त ही हो गया. कई महत्वपूर्ण चीज़ें इसी इमारत में भारत सरकार ने स्वतंत्रता आंदोलन के पहले सशस्त्र संघर्ष की याद में यहाँ एक संग्रहालय स्थापित कर दिया था.
इसी संग्रहालय में जो नई गैलरी बनाई गई है उसमें पिछले दो वर्षों में हुई खुदाई में मिली चीज़ों को रखा गया है. इसमें भरी हुई पिस्तौल हैं, गोले हैं, बंदूक के बोनट हैं और तलवारें हैं. इसमें कुछ सिक्के, मुद्राएँ और कुछ और वस्तुएँ भी हैं. वरिष्ठ पुरातत्वशास्त्री और इस संग्रहालय के प्रभारी डॉ आरएस फ़ोनिया का कहना है कि यूरोपीय पुरुष, महिला और जानवरों की टैराकोटा आकृतियाँ भारत में पहली बार सामने आई हैं. इसमें पोर्सलिन पॉटरी है, इन पर फूल पौधे बने हुए हैं, समुद्री यात्राओं के चित्र हैं और यूरोपीय जीवन शैली को उकेरने वाले कई दृश्य हैं. जो वस्तुएँ अभी मिली हैं उनमें वाइन और शैंपेन की बोतलों के टुकड़े हैं और चाँदी की पॉलिश वाले बर्तन हैं और कई ऐसी वस्तुएँ हैं जिनसे ब्रितानी अफ़सरों के ऐशो आराम से भरी जीवन शैली का पता चलता है. |
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