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चोरी के बाद पटना संग्रहालय की सुध | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पुरातात्विक महत्व की दुर्लभ और बहुमूल्य मूर्तियों की चोरी के बाद सरकार को पटना संग्रहालय की सुध आई है और अब वहाँ सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए जा रहे हैं. अब सरकार वहाँ लगभग एक करोड़ रुपए खर्च करके संग्रहालय को नया रुप देने की योजना बना रही है. उल्लेखनीय है कि रविवार रात से मंगलवार की सुबह के बीच पटना संग्रहालय से बारह सौ साल पुरानी बौद्ध धर्म से जुड़ी मूर्तियाँ चोरी चली गई थीं. इनकी क़ीमत करोड़ों में बताई जा रही हैं. इस चोरी के बाद से राज्य की एनडीए सरकार सकते में है लेकिन चोरी के चार दिन बाद भी इसका कोई सुराग नहीं मिला है. गुरुवार को राज्य सरकार के अधिकारियों, पुरातत्व विभाग और संग्रहालय के अधिकारियों के एक बैठक में तय हुआ कि संग्रहालय की सुरक्षा को और पुख़्ता किया जाए. इसके तहत अब संग्रहालय के चारों ओर वॉच टॉवर बनाए जाएँगे और पूरे भवन में चारों ओर से रोशनी का वैसा ही इंतज़ाम किया जाएगा जैसा कि कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल में किया गया है. इसके अलावा तय किया गया है कि उन कमरों की सारी खिड़कियों को बंद कर दिया जाए जहाँ पुरातात्विक महत्व की मूर्तियाँ रखी गई हैं. दुर्लभ मूर्तियाँ निदेशक अग्रवाल ने बीबीसी को बताया कि बौद्ध धर्म से जुड़ी ये मूर्तियाँ करोड़ों रुपए मूल्य की हैं. बारह सौ साल पुरानी ये मूर्तियाँ काँसे और अष्टधातु से बनी हई हैं और इनका आकार बहुत अधिक नहीं है. वे बताते हैं कि कुछ मूर्तियाँ तो चार से छह इंच के बीच की हैं. अग्रवाल का कहना है कि दुनिया भर में ऐसी दूसरी मूर्तियाँ नहीं हैं. चोरी शहर के बीचों-बीच स्थित पटना संग्रहालय में मूर्तियाँ रविवार 24 सितंबर की शाम तक सजी हुई थीं.
सोमवार को संग्रहालय बंद रहता है. मंगलवार को जब संग्रहालय खुला तो इन मूर्तियों की चोरी का पता चला. संग्रहालय के बगल में कोतवाली थाना है और इसी थाने पर संग्रहालय की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी थी लेकिन उनको भी चोरी का पता नहीं चला. संग्रहालय के निदेशक जेपी अग्रवाल का कहना है कि संग्रहालय बंद होने के बाद चाबियाँ पुलिस को सौंप दी जाती हैं. बिहार सरकार ने इस चोरी के बाद इंटरपोल को इसकी सूचना देकर सतर्क कर दिया है और इस चोरी की जाँच सीबीआई से करवाने का निर्णय लिया है. पुलिस को शक है कि इस चोरी के पीछे किसी मूर्ति तस्कर गिरोह का हाथ हो सकता है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिस तरह से एक ख़ास कमरे में घुसकर मूर्तियाँ चुराई गईं हैं उससे इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि इसके पीछे संग्रहालय का कोई कर्मचारी भी हो सकता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पहले संग्रहालय में हुई चोरी की दो घटनाओं के बाद भी लापरवाही बरती गई और इसी की वजह से यह घटना हुई है. | इससे जुड़ी ख़बरें टैगोर के नोबेल पदक की प्रतिकृति सौंपी07 मई, 2005 | भारत और पड़ोस जिम कॉर्बेट का घर बिकाऊ 19 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस रेसीडेंसी संग्रहालय में एक नई गैलरी16 अगस्त, 2004 | भारत और पड़ोस नोबेल पदक चोरी की जाँच सीबीआई को28 मार्च, 2004 | भारत और पड़ोस रबीन्द्रनाथ टैगोर का नोबेल पदक चोरी25 मार्च, 2004 | भारत और पड़ोस 'पटकथा चोरी की है' | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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