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अब पूरा अफ़ग़ानिस्तान नैटो के ज़िम्मे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नैटो ने अपनी कार्रवाई का विस्तार पूरे अफ़ग़ानिस्तान में करने की घोषणा की है. इसके बाद पूरे अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा की ज़िम्मेदारी नैटो की होगी और वहाँ मौजूद 12 हज़ार अमरीकी सैनिक भी नैटो के नियंत्रण में आ जाएँगे. नैटो के अधिकारियों का कहना है कि अगले कुछ हफ़्तों में इस योजना पर अमल किया जाएगा. पिछले छह महीनों में अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान का प्रभाव बढ़ा है और इसके चलते हिंसा में भी बढ़ॉत्तरी हुई है. गुरुवार को ही अमरीकी सेना के एक प्रवक्ता ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान के पाकिस्तान सीमा से लगे इलाक़ों में हिंसा की घटनाओं में तीन गुना तक तेज़ी आई है. उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनों से अफ़ग़ानिस्तान में नैटो की उपस्थिति बढ़ाने का अनुरोध किया जा रहा था. अमरीका ने चेतावनी भी दी थी कि यदि नैटो देश इसकी स्वीकृति नहीं देते हैं तो अफ़ग़ानिस्तान में शुरु की गई लड़ाई को लोकतंत्र स्थापना के अंतिम लक्ष्य तक पहुँचाना कठिन होगा. मंज़ूरी नैटो देशों के रक्षामंत्रियो की बैठक में अफ़ग़ानिस्तान में कार्रवाई के विस्तार की सहमति बनी है.
इससे पहले भी नैटो की सेनाएँ उत्तर और पश्चिम में सुरक्षा संभालती रही है और हाल ही में दक्षिण में भी उसने सुरक्षा की ज़िम्मेदारी संभाली है. अब जो सहमति बनी है उसके तहत अब नैटो सेनाएँ पूर्व में भी सुरक्षा संभाल लेंगी. इससे पहले तक पाकिस्तान से लगी सीमा पर अमरीकी सेना सुरक्षा का कार्य कर रही थीं. इस पूरे इलाक़े को विद्रोह की दृष्टि से सबसे ख़तरनाक इलाक़ा माना जाता है. अब वहाँ तैनात 12 हज़ार अमरीकी सैनिक नैटो के दायरे में आ जाएँगे. इसके साथ ही अफ़ग़ानिस्तान में नैटो के सैनिकों की कुल संख्या 32 हज़ार हो जाएगी. नैटो के महासचिव जनरल जाप डी हूप शैफ़े का कहना है कि रक्षा मंत्रियों ने अतिरिक्त सैन्य उपकरण भी अफ़ग़ानिस्तान को दान में देने की घोषणा की है. हिंसा में बढ़ोत्तरी अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सेना ने कहा है कि पाकिस्तान की सीमा से लगने वाले इलाक़े में अमरीकी नेतृत्व वाली सेनाओं और अफ़ग़ानिस्तान के सैनिकों पर हाल के दिनों में चरमपंथी हमलों में तेज़ी आई है.
अधिकारियों का कहना है कि हमलों में यह तेज़ी ऐसे हालात में आई है जबकि पाकिस्तानी क्षेत्र में हाल के दिनों में एक शांति समझौता हुआ था जिसका उद्देश्य हिंसा को रोकना था. अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सेना के प्रवक्ता कर्नल जॉन पैराडिस ने कहा है कि देश के पूर्वी प्रांतों पक्तिका और ख़ोस्त के ख़ासतौर से पहाड़ी इलाक़ों में विद्रोही गतिविधियों में महत्वपूर्ण तेज़ी आई है. प्रवक्ता कर्नल जॉन पैराडिस ने कहा कि कुछ इलाक़ों में हमलों में दो गुना तेज़ी आई है और कुछ ऐसे इलाक़े भी हैं जहाँ हमलों में तीन गुना बढ़ोत्तरी हुई है. संवाददाताओं का कहना है कि अमरीकी और अफ़ग़ान अधिकारी पाकिस्तान में क़बायली नेताओं के साथ हुए समझौते को लेकर सशंकित हैं और इस समझौते के मामले में अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के बीच संबंधों में खटास आई है वह समझौता पाकिस्तान के उत्तरी वज़ीरिस्तान क्षेत्र में तालेबान समर्थक ताक़तों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच दो साल से चली आ रही लड़ाई को रोकने के लिए किया गया था. | इससे जुड़ी ख़बरें अफ़ग़ानिस्तान में हमलों में तेज़ी28 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस करजई और बुश ने चरमपंथ पर चर्चा की26 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस मुशर्रफ़-करज़ई में फिर आरोप-प्रत्यारोप21 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'तालेबान लड़ाकों को खदेड़ने का दावा'17 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान को लेकर अमरीकी चेतावनी13 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'अतिरिक्त सैनिकों की माँग नज़रअंदाज़'12 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'अफ़ग़ानिस्तान में और सैनिकों की ज़रूरत'07 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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