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अरब सागर में कमज़ोर पड़ा चक्रवात | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अरब सागर से तटीय गुजरात की ओर बढ़ रहा चक्रवात कमजोर पड़ गया है. मौसम विभाग के मुताबिक चक्रवात अभी समुद्र तट से लगभग 250 किलोमीटर दूर है. पहले इसके रविवार सुबह गुजरात के तटीय इलाक़ों में पहुँचने की संभावना जताई जा रही थी लेकिन अब इसके रविवार शाम या रात तक आने की संभावना है. समुद्री तूफ़ान की गति धीमी पड़ने के बावजूद कच्छ और सौराष्ट्र में सभी एहतियाती उपाए किए जा रहे हैं. सतर्कता प्रशासन ने जनता और प्रशासनिक महकमे को सतर्क रहने की हिदायत दी है. गुजरात के सभी बंदरगाहों पर मछली पकड़ने, नमक बनाने और जहाज़रानी से संबंधित सभी गतिविधियाँ रोक दी गई हैं. कच्छ के जिलाधिकारी संजय द्विवेदी ने समाचार एजेंसियों को बताया, "चक्रवात पोरबंदर के तट से कोई 280 किलोमीटर दूर है. हमने कच्छ और सौराष्ट्र के कुछ ज़िलों में लोगों से सतर्क रहने को कहा है क्योंकि ये चक्रवात के रास्ते में पड़ते हैं." समाचार एजेंसियों के अनुसार, जामनगर के ज़िलाधिकारी का कहना है, "इस समय चक्रवात की गति सौ से 120 किलोमीटर प्रति घंटा है और जब ये पश्चिमी तट तक पहुँचता है तब भी इसकी यही गति होने की संभावना है." जिन बंदरगाहों के लिए सबसे ज़्यादा ख़तरा है, वे हैं - कांडला, मुंदरा, पोरबंदर, जामनगर और कच्छ. बंदरगाहों के प्रशासन ने अनेक कर्मचारियों को सुरक्षित जगहों पर पहुँचाया है. गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने पत्रकारों को बताया, "मछुआरों को हिदायत दी गई है कि वे समुद्र में न जाएँ. निचले इलाक़ों में रहने वाले लोगों को भी वहाँ से हट जाने की सलाह दी गई है. एक छोटी सी पत्रिका भी बाँटी गई है ताकि लोगों को बताया जा सके कि चक्रवात आने के समय क्या करना चाहिए." इस हफ़्ते बंगाल की खाड़ी में आए तूफ़ान के कारण बांग्लादेश में 170 लोग मारे गए हैं और अनेक मछुआरे लापता हैं. |
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