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नेपाल के 174 'लापता' लोगों की जानकारी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल की सरकार ने वहाँ दस साल से ज़्यादा समय तक चले सशस्त्र आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद लापता हुए 174 से ज़्यादा लोगों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की है. लेकिन सैकड़ों अन्य का कुछ अता पता नहीं है और उनके बारे में पता लगाने की कोशिश हो रही है. मानवाधिकार संगठनों के अनुसार ऐसे लोगों की संख्या 900 से ज़्यादा है. नेपाल के गृह मंत्री कृष्ण प्रसाद सिटौला ने नेपाल की प्रतिनिधि सभा में बताया कि लापता हुए लोगों के 776 मामलों में से जानकारी केवल 174 के बारे में मिल पाई है. इनमें से 52 मारे गए, एक भगौड़ा हो गया, एक अभी भी जेल में है और अन्य सभी को रिहा कर दिया गया है. 'स्वतंत्र आयोग गठित करें' महत्वपूर्ण है कि नेपाल में लापता हुए लोगों के परिवारों और रिश्तेदारों ने बार-बार विरोध प्रदर्शन किए हैं और सरकार से इन लोगों के बारे में जानकारी को सार्वजनिक करने का आग्रह किया है. संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकारों के बारे में उच्चायुक्त ने नेपाल सरकार के अनुरोध किया है कि वह स्वतंत्र और सशक्त आयोग गठित करे जो इन सभी मामलों की जाँच करे. उनका ये भी कहना था कि सरकार ने उस मामले में अब भी अपनी राय स्पष्ट करनी है जिसमें तीन साल पहले काठमांडू के सैन्य अड्डे से हिरासत में लिए गए 40 लोग लापता हो गए थे. माओवादी विद्रोह के दौरान नेपाल में 13 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए. | इससे जुड़ी ख़बरें पहले बड़े बदलाव हों: प्रचंड17 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में सेना प्रमुख को हटाने की माँग16 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस राजा की भूमिका पूरी तरह ख़त्म हो-प्रचंड14 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस हथियारों के मुद्दे पर हो गई सहमति09 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस 'नेपाल में बातचीत टूटने के कगार पर'07 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस 'कोइराला भूल गए कि सत्ता कैसे मिली'07 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस राजपरिवार के पास 1700 एकड़ ज़मीन04 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में राजशाही से जुडा विधेयक 01 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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