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एयर होस्टेस बनेंगी आदिवासी लड़कियाँ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हवाई यात्रा छत्तीसगढ़ की आदिवासी लड़कियों के लिए अब हवाई कल्पना नहीं है. वे जल्द ही उड़ान भरना शुरू करेंगी, एयर होस्टेस के रूप में. छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य से हर साल अनुसूचित जाति-जनजाति की लड़कियों को एयर होस्टेस बनने का प्रशिक्षण दिलवाने का निर्णय लिया है. गांव की धूल उड़ाती सड़कों और नदी-नालों-जंगलों में नंगे पाँव चलने वाली आदिवासी लड़कियों में इस बात को लेकर भारी उत्साह है. अनुसूचित जाति-जनजाति विभाग के सचिव एमके राऊत के अनुसार इन आदिवासी लड़कियों को एक साल तक एयर होस्टेस इंस्टीट्यूट में प्रशिक्षण दिया जाएगा. इसके बाद नौकरी की व्यवस्था के लिए भी सरकार कोशिश करेगी. योजना इस योजना के तहत पहले साल 12 लड़कियों का चयन किया जाएगा. इस प्रशिक्षण के लिए जिन लड़कियों का चयन किया जाएगा, उनकी शैक्षणिक योग्यता बारहवीं कक्षा रखी गई है. राज्य के पिछड़ा विकास मंत्री गणेशराम भगत कहते हैं, “देश में अपनी तरह की यह अकेली योजना है, जिससे आदिवासी समाज की लड़कियों में भी आत्मविश्वास आएगा. हमने इसके लिए 12वीं कक्षा की योग्यता इसलिए रखी है कि इस समाज में अधिक पढ़ने-लिखने वालों की संख्या कम है.” गणेशराम भगत का दावा है कि हवाई सेवाओं का लगातार विस्तार हो रहा है और जिस तेज़ी के साथ एक के बाद एक कंपनियां इस क्षेत्र में आ रही हैं, उससे एयर होस्टेस का प्रशिक्षण पाने वाली लड़कियों को रोज़गार पाने में कोई परेशानी नहीं होगी. लेकिन कई आदिवासी लड़कियों का मानना है कि एयर होस्टेस बनने का सपना देखना “हवाई” बात है. प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करने वाली शीतल कंवर की राय है कि छोटे-छोटे गांव और कस्बों से आने वाली लड़कियों के लिए एयर होस्टेस का 'ग्लैमरस' पेशा सपने की तरह है. वे अपना ध्यान प्रतीयोगी परीक्षा की तरफ़ ही लगाना चाहती हैं. उनकी ही तरह कोरबा की अलका उरांव ने अभी-अभी ग्रेजुएशन किया है. शंकाएँ अलका कहती हैं, "एयर होस्टेस जैसे पद के लिए बचपन से ही जिस तरह का परिवेश चाहिए, हम लोग उससे बहुत दूर हैं. किसी तरह अगर हमें प्रशिक्षण मिल भी जाए, तो भी महानगरों से आने वाली दूसरी एयर होस्टेसों के मुकाबले हम दोयम दर्जे के ही साबित होंगे." स्नातक की छात्रा शीला मंडावी एक दूसरा ही सवाल उठाती हैं. उनका कहना है कि एयर होस्टेस जैसे पद पर चयन का मुख्य आधार लड़की का सुंदर होना है. शीला को नहीं लगता कि जिस भारतीय समाज में गोरेपन और नैन-नक़्श को इतना महत्व मिलता है, वहां इस तरह का प्रशिक्षण आदिवासी लड़कियों के किसी काम का होगा. हालांकि बिलासपुर के आदिवासी कन्या छात्रावास में रहने वाली वैजयन्ती सिंह ऐसी बातों से सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि अगर सरकार प्रशिक्षण की सुविधा दे रही है तो उसका लाभ उठाना चाहिए. वैजयन्ती ने तो प्रशिक्षण योजना में चयन के उद्देश्य से अभी से अंग्रेजी कोचिंग क्लास में जाना शुरु कर दिया है. वैजयन्ती सवाल की मुद्रा में कहती हैं-“कोई भी प्रतिभा क्या जन्मजात होती है?” | इससे जुड़ी ख़बरें एयरबस से 43 विमान ख़रीदेगा भारत07 सितंबर, 2005 | कारोबार बिना रुके सबसे लंबी उड़ान का रिकॉर्ड11 फ़रवरी, 2006 | खेल वीडियोः सबसे लंबी उड़ान का रिकॉर्ड12 फ़रवरी, 2006 | खेल मिग-25 विमानों को कहा जाएगा अलविदा09 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस चीनी व्यापारी ने मिग 21 खरीदा02 मई, 2006 | कारोबार विशाल एयरबस लंदन हवाईअड्डे पर18 मई, 2006 | कारोबार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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