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'पोप को ऐसा नहीं कहना चाहिए था' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पोप को अपनी बात कहनी चाहिए थी पर इसमें मैन्युअल द्वितीय का हवाला देना कहाँ से उचित है जबकि मैन्युअल की बातों में इस्लाम को लेकर काफ़ी नकारात्मक सोच रही है. यह ठीक है कि पोप साहब जो कह रहे थे उसका एक संदर्भ था. संदर्भ था ईमान और तर्क में क्या संबंध है. यह सही है कि ईमान अंधा नहीं होना चाहिए, उसे तर्क पर अधारित होना चाहिए. लेकिन पोप को अपने भाषण में राजा मैन्युअल द्वितीय के कथन का हवाला नहीं देना चाहिए था. मैन्युअल द्वितीय ने इस्लाम के बारे काफी नकारात्मक बात कही है. मैन्युअल ने कहा था कि हजरत मोहम्मद ने दुनिया को कुछ भी नया नहीं दिया. सिर्फ हिंसा दी. इस्लाम हिंसा के बल पर धर्म फैलाने की पैरवी करता है. इस्लाम पर अगर हिंसा का समर्थन करने का आरोप लगाया जाता है तो हम उस पर बात करने के लिए तैयार हैं. ऐसे में पोप को अपने बयान में मैन्युअल के बयान का हवाला नहीं देना चाहिए. पोप साहब बहुत बुज़ुर्ग और सम्मानित आदमी हैं. उन्हें ऐसी बातों का जिक्र नहीं करना चाहिए. इससे लोगों के ठेस लगी है. मैं मानता हूँ कि किसी संदर्भ में ग़लत बातें नहीं आनी चाहिए और इसके लिए आपस में बातचीत होनी चाहिए. दुनिया में अगर कोई दो धर्म समान हैं तो वह इस्लाम और ईसाई है. इसके अलावा भी दुनिया के सभी धर्मों में 95 प्रतिशत एक ही हैं. जिन मुद्दों पर मतभेद हैं उन्हें बातचीत से सुलझाया जा सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें पोप के बयान पर प्रतिक्रियाएँ15 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना पोप के इस्लाम संबंधी बयान का विवाद?15 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना पोप के बयान पर मुसलमानों में ग़ुस्सा15 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना पोप की टिप्पणी से मुसलमान नाराज़15 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना चीन-वेटिकन तनाव बढ़ने की आशंका14 मई, 2006 | पहला पन्ना धर्म में तोड़-मरोड़ न करें: पोप21 अगस्त, 2005 | पहला पन्ना आतंकवाद के ख़िलाफ़ पोप की अपील20 अगस्त, 2005 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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