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नैटो देशों की ठंडी प्रतिक्रिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर अटलांटिक संधि संगठन - नैटो ने कहा है कि उसके सदस्य देशों ने अफ़ग़ानिस्तान में तैनाती के लिए अतिरिक्त सैनिक मुहैया कराने के कमांडरों के अनुरोध का कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया है. ग़ौरतलब है कि अफ़ग़ानिस्तान में हालात को देखते हुए नैटो सैन्य कमांडरों ने लगभग ढाई हज़ार अतिरिक्त सैनिक तैनात किए जाने की बात कही थी और नैटो के सदस्य देशों से ये अतिरिक्त सैनिक जल्द से जल्द मुहैया कराने का अनुरोध किया था. नैटो के लगभग 20 हज़ार सैनिक पहले से ही अफ़ग़ानिस्तान में तैनात हैं और कमांडर लगभग ढाई हज़ार अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की माँग कर रहे हैं. अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिणी हिस्से में तालेबान लड़ाकों से लड़ रही अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता सेना अतिरिक्त सैनिक तैनात किए जाने की माँग कर रही है. इसी सेना के दबाव के बीच नैटो के सदस्य देशों की एक बैठक बुधवार को बेल्जियम में हुई. नैटो के प्रवक्ता जेम्स अप्पादुरई ने एक पत्रकार सम्मेलन में कहा, "अतिरिक्त सैनिक मुहैया कराने की मांग पर किसी देश भी की तरफ़ से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आई है." हालाँकि प्रवक्ता ने कहा कि ऐसे संकेत मिले हैं कि कुछ सदस्य देश भविष्य में अतिरिक्त सैनिक मुहैया कराने पर विचार कर सकते हैं. संवाददाताओं का कहना है कि जर्मनी, इटली और तुर्की सहित नैटो देशों में अफ़ग़ानिस्तान में और सैनिक भेजने के बारे में हिमायती माहौल नहीं है क्योंकि उनके सैनिक अन्य स्थानों पर पहले से ही दबाव में हैं. इससे पहले अमरीका ने चेतावनी दी कि यदि नैटो के सदस्य देश सैन्य सहायता नहीं बढ़ाते हैं तो अफ़ग़ानिस्तान एक नाकाम राष्ट्र में तब्दील हो जाएगा. अमरीकी विदेशमंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने कनाडा में कहा कि यदि नैटो देशों ने तालेबान लड़ाकों के ख़िलाफ़ लड़ाई को इस समय छोड़ दिया तो अफ़ग़ानिस्तान फिर दुनिया के लिए एक मुसीबत बन जाएगा. अफ़ग़ानिस्तान में लगभग साढ़े 18 हज़ार विदेशी सैनिक तैनात हैं जिनमें ज़्यादातर नैटो के सदस्य देशों के हैं. अफ़ग़ानिस्तान में लगभग इतनी ही संख्या में अमरीकी सैनिक तैनात हैं.
इन सैनिकों की लगभग आधी संख्या दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में तैनात है जिनमें कनाडा और ब्रिटेन के सैनिक ज़्यादा संख्या में हैं. उन्हें अमरीकी वायु सेना का समर्थन मिलता है. गर्मसर में लड़ाई इस बीच अफ़ग़ानिस्तान में अधिकारियों ने कहा है कि दक्षिणी प्रांत हेलमंद में पुलिस के साथ लड़ाई में 16 तालेबान लड़ाके मारे गए हैं. अधिकारियों के अनुसार यह लड़ाई पाकिस्तानी सीमा से मिलने वाले पहाड़ी इलाक़े गर्मसर में मंगलवार देर रात शुरू हुई और बुधवार सुबह तक चली. स्थानीय पुलिस का कहना है कि अफ़ग़ान लड़ाके कई घंटों तक पहाड़ी इलाक़ों में फँसे रहे. बाद में कुछ लड़ाके पहाड़ियों में और दूर की तरफ़ भाग गए. अधिकारियों ने कहा है कि तालेबान लड़ाकों ने गर्मसर शहर पर क़ब्ज़ा कर लिया था और छह दिन तक बनाए रखा. अधिकारियों के अनुसार गत सोमवार को अफ़ग़ान और नैटो सैनिकों ने गर्मसर शहर को तालेबान लड़ाकों के क़ब्ज़े से छुड़ा लिया. पाकिस्तान स्थित समाचार एजेंसी अफ़ग़ान इस्लामिक प्रेस के अनुसार तालेबान के एक प्रवक्ता ने इन ख़बरों का खंडन किया है कि कोई तालेबान मारा गया है लेकिन यह ज़रूर स्वीकार किया कि गर्मसर पर से उनका नियंत्रण समाप्त हो गया है. | इससे जुड़ी ख़बरें अफ़ग़ानिस्तान को लेकर अमरीकी चेतावनी13 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान में '94 तालेबान मारे गए'10 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'अफ़ग़ानिस्तान में और सैनिकों की ज़रूरत'07 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'अफ़ग़ानिस्तान में नैटो के सैनिक बढ़ें'09 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'अफ़ग़ानिस्तान का युद्ध इराक़ से भीषण'08 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'कंधार में 200 तालेबान लड़ाके मारे गए'03 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान में बढ़ती हिंसा की वजह20 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस नाकाम राष्ट्रों की सूची में पाकिस्तान ऊपर02 मई, 2006 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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