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श्रीलंका को मदद रोकने की चेतावनी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र ने श्रीलंका सरकार को दी जाने वाली आर्थिक मदद से हाथ खींच लेने की चेतावनी दी है. संघर्षविराम निगरानीकर्ता सहायताकर्मियों की हत्या से नाराज़ हैं. अंतरराष्ट्रीय समुदाय पिछले दिनों श्रीलंका में फ्रांसीसी स्वयंसेवी संगठन ‘एक्शन अगेंस्ट हंगर’ के सदस्यों की हत्या को लेकर काफ़ी नाराज़ हैं. कुछ दिन पहले युद्धविराम निगरानीकर्ताओं को इस संगठन के 17 सदस्यों के शव मिले थे. अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का कहना है कि श्रीलंका में हुए इस नरसंहार के लिए श्रीलंकाई सेना दोषी है. वहीं श्रीलंका सरकार ने इस आरोप को बेबुनियाद बताया है. संयुक्त राष्ट्र ने अपने स्वयंसेवी संगठनों को श्रीलंका में काम करने से मना कर दिया है. स्वीडन, फिनलैंड और डेनमार्क के स्वयंसेवी श्रीलंका छोड़ चुके हैं. ग़ौरतलब है कि श्रीलंका में लंबे समय से सरकार और तमिल विद्रोहियों यानी एलटीटीई के बीच संघर्ष चल रहा है. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि श्रीलंका सरकार ने अभी तक मारे गए 17 लोगों की हत्या के संबंध में सही कारण नहीं बताए हैं. संयुक्त राष्ट्र ने श्रीलंका में लोगों का जीवनस्तर सुधारने के लिए करीब 37.5लाख डॉलर की मदद देने का वादा किया था. यदि इन स्वयंसेवी संस्था के कार्यकर्ताओं की हत्या के दोषियों को सज़ा नहीं दी गई तो संयुक्त राष्ट्र इस मदद को रोक सकता है. श्रीलंका पर्यवेक्षक दल के प्रमुख मेजर जनरल उल्फ़ हेनरिक्सन का कहना है, “हमें कुछ सूत्रों से पुख्ता जानकारी मिली है कि इस नरसंहार का मुख्य दोषी कौन है.” वैसे तो श्रीलंका में फ़रवरी, 2002 से सरकार और एलटीटीई के बीच संघर्ष विराम घोषित है लेकिन पिछले कुछ समय से इनके बीच अघोषित लड़ाई तेज हो गई है. सात अगस्त को स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं की लाशें भी उसी जगह से बरामद हुई हैं जहां लंबे समय से तमिल विद्रोहियों और सेना के बीच संघर्ष चल रहा था. हालांकि श्रीलंका सरकार के विदेश मंत्री मगंला समरवीरा ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि श्रीलंका में किसी भी तरह से गृह युद्ध की स्थित नहीं है. | इससे जुड़ी ख़बरें श्रीलंका सेना पर 'हत्या' का आरोप30 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस एलटीटीई के ख़िलाफ़ ताज़ा सैनिक कार्रवाई28 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस विदेशियों को जाफ़ना से निकाला गया26 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस हफ़्तों बाद राहत सामग्री जाफ़ना पहुँची25 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस 'यूरोपीय संघ के रूख़ से नाराज़ एलटीटीई'20 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस सेना और एलटीटीई में संघर्ष जारी20 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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