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मंगलवार, 22 अगस्त, 2006 को 14:27 GMT तक के समाचार
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कोला में कीटनाशक विवाद में नया मोड़
कोला
कुछ राज्यों में बोतलबंद शीतल पेयों पर रोक लगा दी गई है
स्वास्थ्य मंत्रालय की कोला मामले पर गठित विशेषज्ञ समिति ने मंगलवार को कहा है कि सीएसई की रिपोर्ट असंतुलित है और पर्याप्त जानकारी नहीं देती है.

जाँच समिति ने अपनी 60 पेज की रिपोर्ट में कहा है कि सीएसई ने कोला पेयों के बारे में जो रिपोर्ट दी है उसमें कई ऐसी जानकारियाँ नहीं है जिनके आधार पर रिपोर्ट के नतीजे को सही माना जा सके.

उधर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदौस ने मंगलवार को लोकसभा में दिए गए एक वक्तव्य में कहा है कि सरकार कोला पेयों के लिए मानक स्थापित करने के लिए काम कर रही है और इसके लिए चार महीने का वक़्त लग सकता है.

उन्होंने बताया कि कोला पेयों में तीन तरह के मानक देखने की ज़रूरत है. पहला पानी, दूसरा मीठे पदार्थ और तीसरा अन्य रसायन. इनमें से पानी के लिए तो मानक तय है पर बाकी के लिए काम हो रहा है.

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, "मानक स्थापित करने के लिए हम जाँच-परीक्षण कर रहे हैं और आशा है कि जनवरी 2007 तक मानक तय किए जा सकेंगे."

आरोप-प्रत्यारोप

स्वास्थ्य मंत्री का बयान ऐसे वक्त में आया है जब उनके मंत्रालय की ओर से सीएसई की रिपोर्ट को ग़लत करार दिया गया है.

 मानक स्थापित करने के लिए हम जाँच-परीक्षण कर रहे हैं और आशा है कि जनवरी 2007 तक मानक तय किए जा सकेंगे
अंबुमणि रामदौस

इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सीएसई ने कहा है कि सरकार की ओर से जारी रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया जा सकता है.

संस्था की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि ऐसा लगता है कि सरकार को लोगों के स्वास्थ्य की चिंता नहीं है बल्कि कंपनियों के स्वास्थ्य की चिंता है.

ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों पर्यावरण के मुद्दे पर काम करने वाली संस्था सीएसई ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि भारत में बिक रहे कई कोला पेयों में कीटनाशक तय से अधिक मात्रा में हैं और इससे लोगों के स्वास्थ्य पर ग़लत असर पड़ेगा.

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद भारत के कुछ राज्यों में राज्य सरकारों ने कोला पेयों पर प्रतिबंध लगा दिया था.

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