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कीटनाशक तो माँ के दूध में भी-पवार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक ओर देश भर में शीतल पेयों में कीटनाशक की मात्रा को लेकर विवाद चल रहा है और दूसरी ओर कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा है कि कीटनाशक की मात्रा तो नारियल के पानी और माँ के दूध में भी होती है. उनका कहना था कि मुद्दा कीटनाशक की मौजूदगी की मात्रा का है और इसके अंश स्वीकृत मात्रा से ज़्यादा नहीं होने चाहिए. शरद पवार उस संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष थे जिसने इस मामले की जाँच की थी और अपनी रिपोर्ट सरकार को दी थी. उल्लेखनीय है कि दिल्ली की एक ग़ैरसरकारी संस्था विज्ञान और पर्यावरण केंद्र (सीएसई) ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट में कहा है कि शीतल पेयों में ज़हरीले कीटनाशकों की मात्रा बहुत अधिक है. इस संस्था ने तीन साल पहले भी अपनी रिपोर्ट में यही कहा था लेकिन अब संस्था का कहना है कि शीतल पेयों में कीटनाशक की मात्रा पहले से भी अधिक है. समाचार एजेंसियों के अनुसार मुंबई में एक पत्रकारवार्ता को संबोधित कर रहे शरद पवार से जब शीतल पेयों पर प्रतिबंध की माँग पर सवाल पूछे गए तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया. शरद पवार ने कहा है कि ये संबंधित मंत्रालय पर निर्भर करता है वह संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट पर कार्रवाई करे. समाचार एजेंसी यूएनआई के अनुसार पवार ने कहा, "यह तो विशेषज्ञों पर है कि वे जल्दी से जल्दी यह तय करें कि कीटनाशकों की कितनी मात्रा की अनुमति होनी चाहिए." ऐसे समय में जब सीएसई की रिपोर्ट आने के बाद से शीतल पेयों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हो रहे हैं और जगह-जगह से शीतल पेयों पर रोक लगाए जाने की ख़बरें आ रही हैं, शरद पवार के इस बयान पर कई विश्लेषकों को आश्चर्य हुआ है. | इससे जुड़ी ख़बरें पेप्सी, कोक को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस04 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस 'शीतल पेयों में कीटनाशक और अधिक'02 अगस्त, 2006 | विज्ञान "शीतलपेयों में कीटनाशकों की रिपोर्ट सही"04 फ़रवरी, 2004 | भारत और पड़ोस कीटनाशक की जगह पेप्सी-कोक01 नवंबर, 2004 | भारत और पड़ोस संसद में कोक-पेप्सी बंद | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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