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केरल हाईकोर्ट कोकाकोला के पक्ष में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केरल के पल्लकाड़ ज़िले में स्थित कोका कोला संयंत्र का विरोध कर रहे संगठन के लोगों को उस वक्त एक करारा धक्का लगा जब केरल हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में पेरूमट्टी ग्राम पंचायत से कहा कि वो कोका कोला फ़ैक्ट्री को फिर से काम शुरू करने के लिए लाइसेंस दें. कोका कोला की यह फ़ैक्ट्री प्लाचीमाड़ा में है और पेरूमट्टी पंचायत के तहत आती है. पिछले दो सालों से यहाँ के लोगों ने संयंत्र बंद करवाने के लिए अभियान छेड़ा था. विरोध कर रहे लोगों का कोका कोला पर आरोप है कि बिना इजाज़त के भूजल के इस्तेमाल और प्रदूषण फैलाने के कारण वहाँ के लोगों को पेयजल की समस्या का सामना करना पड़ रहा है. इस मुहीम से वामपंथी दलों के जुड़ जाने के बाद से इस मुहीम को और भी ताकत मिली है. हालांकि इस कोका कोला प्लांट को इजाज़त देने वाली सरकार भी वामपंथी गठबंधन एलडीएफ़ की ही थी. नरम रुख़ पिछले कुछ हफ़्तों में केरल हाईकोर्ट ने कोका कोला की ओर नरम रुख़ तब अपनाया, जब उच्च न्यायालय द्वारा स्थापित एक पर्यावरण समिति ने प्लाचीमाड़ा में कोका कोला का विरोध कर रहे संगठनों को ग़लत ठहराया. बुधवार को दिए अपने आदेश में उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने यह भी कहा है कि अगर पेरूमट्टी ग्राम पंचायत 10 जून तक लाइसेंस जारी नहीं करेगी तो यह मान लिया जाएगा कि कोका कोला को दो साल के लिए लाइसेंस जारी कर दिया गया है. आदेश में यह भी कहा गया है कि प्लाचीमाड़ा के इस कोका कोला प्लांट में कंपनी को कुछ विशेष हिदायतों को ध्यान में रखना होगा और निर्धारित पानी की मात्रा का इस्तेमाल करना होगा. पंचायत को निर्देश दिए जाने के लिए कोका कोला ने हाईकोर्ट में एक अर्जी दायर की थी जिसपर न्यायालय ने यह अंतरिम फ़ैसला सुनाया है. हालांकि कोका कोला का विरोध कर रहे संगठनों के प्रतिनिधि बेनू ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि वो इससे हतोत्साहित नहीं हैं और अपना अभियान जारी रखेंगे. |
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