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खदान दुर्घटना: लोगों ने उम्मीद छोड़ी

कोयला खदान
झारखंड में कई कोयला खदान है
पिछले 10 दिनों से झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा पर एक बंद पड़ी कोयला खदान में फँसे लोगों के जीवित बचे होने की संभावना क्षीण होती जा रही है. स्थानीय लोगों ने भी अब उम्मीद छोड़ दी है.

दो अगस्त की रात से ये लोग खदान में फँसे हुए हैं. खदान में कितने लोग फँसे हुए हैं. इस पर प्रशासन और स्थानीय लोगों अलग-अलग बात कर रहे हैं.

झारखंड के अधिकारियों ने जहाँ 10 लोगों के फँसे होने के बात कही है, वहीं पश्चिम बंगाल और झारखंड के कई गाँव के लोग संख्या 100 के आसपास बता रहे हैं.

दो दिन बाद नींद से जागे पश्चिम बंगाल प्रशासन और ईस्टर्न कोलफ़ील्ड लिमिटेड की ओर से राहत कार्य शुरू करने की कोशिश तो हुई लेकिन पानी के तेज़ बहाव के कारण राहत कार्य बार-बार रोकना पड़ा.

फ़िलहाल स्थिति ये है कि ईस्टर्न कोलफ़ील्ड लिमिटेड के तीन पंप पानी निकालने के लिए वहाँ लगाए गए हैं. लेकिन राहत कार्य नहीं हो पा रहा.

दरअसल ये कोयला खदान 1970 में ही बंद हो गई था. लेकिन कोयला माफ़िया यहाँ ग़ैर क़ानूनी रूप से कोयला खनन का काम करवाते थे. ये कोयला खदान नदी के बीच में स्थित है.

इस कारण इसमें पानी भरा हुआ है. कोयला मंत्री शिबू सोरेन के दौरे के बाद राहत कार्य शुरू करने में तेज़ी आई और पुरुलिया ज़िला प्रशासन ने सेना की मदद भी ली.

लेकिन सेना के जवानों ने पानी के तेज़ बहाव के कारण राहत कार्य संभव न हो पाने की बात कही. यहाँ तक की गोताखोरों को भी बुलाया गया. लेकिन उनके पास भी खदान का नक्शा नहीं था.

कितने लोग फँसे?

खदान के आसपास स्थित पश्चिम बंगाल और झारखंड के कई गाँवों के लोगों का दावा है कि खदान में फँसे लोगों की संख्या 100 के आसपास है.

धनबाद के पुलिस अधीक्षक बलजीत सिंह ने 10 लोगों के फँसे होने की बात स्वीकार की है. लेकिन पश्चिम बंगाल के गाँवों से कितने लोग उस समय वहाँ काम कर रहे थे, इस बारे में जानकारी नहीं मिली है.

इतना ज़रूर पता चला है कि पश्चिम बंगाल के कई गाँव से लोग लापता हैं. दरअसल अवैध खनन में काम करने के कारण लोग डर से सामने आकर कुछ नहीं कर रहे.

और तो और बचाव कार्य शुरू करने से पहले पुरुलिया ज़िला प्रशासन ने दो एफ़आईआर भी दर्ज किया है. पहला एफ़आईआर अज्ञात कोयला माफ़िया के खिलाफ़ है और दूसरा अज्ञात मज़दूरों के ख़िलाफ़.

इस कारण कई गाँव के लोग लापता हुए लोगों के बारे में बताने से कतरा रहे हैं. झारखंड के 10 लापता लोगों के परिजनों ने तो पंचेत थाने में पाँच कोयला माफ़िया का भी नाम दिया है.

इन लोगों का आरोप है कि कोयला माफ़िया 50 रुपए की दिहाड़ी के नाम पर लोगों से अवैध खनन का काम करवाते थे.

इन इलाक़ों में बेरोज़गारी की समस्या है. कई खानों के कारण ज़मीन उपजाऊ नहीं है और 300 से ज़्यादा औद्योगिक इकाइयाँ बंद हो गई है. इस कारण लोग 50 रुपए की दिहाड़ी के लिए अपनी ज़िंदगी दाँव पर लगा देते हैं.

'सब्ज़ी बेचकर क्रांति'
समाचार चैनलों का हाल ये है कि वे सब्ज़ी बेचकर क्रांति की बात कर रहे हैं.
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