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कोयला खदान में पानी,लोग फँसे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
झारखंड और पश्चिमी बंगाल की सीमा पर एक कोयला खदान में पानी भरने से अनेक लोग अंदर फँस गए हैं. घटनास्थल पर मौजूद पत्रकार सलमान रावी के अनुसार स्थानीय लोग खदान में फँसे लोगों की संख्या 100 से अधिक बता रहे हैं. मगर सरकारी तौर पर फँसे लोगों की संख्या लगभग 30 बताई जा रही है. झारखंड के धनबाद शहर के पुलिस अधीक्षक बलजीत सिंह के अनुसार अभी फँसे लोगों की निश्चित संख्या के बारे बारे में और अधिक बता पाना संभव नहीं है. पश्चिम बंगाल की सरकार और कोल इंडिया लिमिटेड के कर्मचारी घटनास्थल पर बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं. सलमान रावी के अनुसार पुरुलिया और बर्दवान के बीच स्थित इस खदान में खनन का काम बंद किया जा चुका था लेकिन फिर भी लोग वहाँ अवैध रूप से खनन करते रहते हैं. धनबाद के पुलिस अधीक्षक बलजीत सिंह ने बीबीसी को बताया कि घटनास्थल से सटे झारखंड के खैर-क्यारी गाँव के कम से कम 10 लोग लापता हैं और फँसे लोगों के बचने की संभावना बेहद कम है. जिस स्थान पर ये खदान है वहाँ दामोदर और बराकर नदियाँ मिलती हैं और समझा जा रहा है कि इन्हीं नदियों का पानी खदान में घुस गया है. पिछले 48 घंटे से भारी बारिश होने के कारण भी इन नदियों में जलस्तर बढ़ा हुआ था. स्थानीय अधिकारियों का अनुमान है कि खदान के अंदर 40-50 फ़ुट पानी हो सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें झारखंड में खदान धँसी11 अक्तूबर, 2002 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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