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रविवार, 06 अगस्त, 2006 को 14:01 GMT तक के समाचार
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खदान हादसा: सेना से मदद की गुहार
मजदूर
पिछले पाँच दिनों से फंसे लोगों का जिंदा रह पाना मुश्किल है
झारखंड-पश्चिम बंगाल की सीमा पर स्थित कोयला खदान में बुधवार रात से फंसे लोगों का पता लगाने के लिए स्थानीय प्रशासन ने अब सेना की मदद माँगी है.

उधर खदान में फंसे लोगों का अभी तक पता न चलने की वजह से वामपंथी दल भाकपा माले ने चेतावनी दी है कि अगर सोमवार तक राहत कार्य शुरू नहीं हो पाता है तो वे पश्चिम बंगाल को हो रही बिजली-पानी की आपूर्ति रोक देंगे.

पश्चिम बंगाल को पंचेत और मैथन बाँधों से पानी की आपूर्ति की जाती है. भाकपा माले की ओर से चेतावनी में कहा गया है कि वो इन बाँधों से राज्य को हो रही पानी की आपूर्ति रोक देंगे.

स्थानीय लोगों में भी अभी तक कोई राहत कार्य शुरू न होने पर काफ़ी रोष व्याप्त है.

घटना के पाँचवें दिन पुरुलिया के ज़िला कलेक्टर ने सेना के आला अधिकारियों को एक पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई है.

निंदा

अभी तक कोई राहत कार्य शुरू नहीं हो पाया है और इस बात का भी अंदाजा नहीं लगाया जा सका है कि खदान में कितने लोग फंसे हैं.

ऐसे में खदान में फंसे लोगों के जीवित बचे होने की संभावनाएँ भी कम होती जा रही हैं.

केंद्रीय कोयला और खान मंत्री शिबू सोरेन का कहना है कि अभी तक खदान में फंसे लोगों का पता नहीं चल पाना दुर्भाग्यपूर्ण है.

शिबू सोरेन ने शनिवार को दुर्घटनास्थल का दौरा कर बचाव कार्य का जायज़ा लिया था जिसके बाद उन्होंने बीबीसी से बातचीत में बचाव कार्यों को लेकर अपनी नाराज़गी जताई.

पुरुलिया और बर्दवान के बीच स्थित इस खदान में अचानक पानी भर जाने के कारण कोयला निकालने गए कई लोग बुधवार रात से ही इसमें फंसे हुए हैं.

स्थानीय लोगों के मुताबिक जिस समय यह दुर्घटना हुई उस समय लगभग 100 मजदूर खदान के अंदर थे. हालांकि प्रशासन के मुताबिक खदान में 30 लोगों के फंसे होने का अनुमान लगाया जा रहा है.

दोषी कौन?

बुधवार को हुई इस घटना को पाँच दिन बीत जाने के बाद भी राहत कार्य शुरू न हो पाने के लिए स्थानीय प्रशासन और पश्चिम बंगाल सरकार को दोष दिया जा रहा है.

स्थानीय लोग और खदान में फंसे लोगों के परिजन इस बारे में मुंह तो खोलते हैं पर स्थानीय प्रशासन की दहशत का आलम यह है कि कोई भी व्यक्ति औपचारिक तौर पर कुछ भी नहीं कह रहा है.

घटनास्थल पर पहुँचे बीबीसी के स्थानीय संवाददाता सलमान रावी ने बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने पहले तो ऐसी किसी घटना के होने से ही इनकार कर दिया.

बाद में झारखंड के धनबाद शहर के पुलिस अधीक्षक बलजीत सिंह ने जब पुरुलिया प्रशासन ने अपने क्षेत्र के 10 लोगों के लापता होने की बात कही तभी प्रशासन हरक़त में आया.

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से कोई भी बड़ा प्रतिनिधि अभी तक घटनास्थल का दौरा करने नहीं पहुँच सका है. वर्ष 1970 में ही बंद घोषित होने के बावजूद इस खदान से अवैध खनन जारी था.

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