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बचाव कार्य से ख़ुश नहीं खान मंत्री | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्रीय कोयला और खान मंत्री शिबू सोरेन का कहना है कि झारखंड-पश्चिम बंगाल की सीमा पर स्थित कोयला खदान में पिछले पाँच दिनों से फंसे लोगों का पता नहीं चल पाना दुर्भाग्यपूर्ण है. शिबू सोरेन ने शनिवार को दुर्घटनास्थल का दौरा कर बचाव कार्य का जायजा लिया. उन्होंने बीबीसी से बातचीत में बचाव कार्यों को लेकर अपनी नाराज़गी जताई. उनका कहना था, " हमने तो ये सुना है कि जो लोग खान के अंदर गए वे मर गए, बह गए. अब ये जानना बहुत ज़रुरी है कितने लोग अंदर थे. " ग़ौरतलब है कि पुरुलिया और बर्दवान के बीच स्थित इस खदान में अचानक पानी भर जाने के कारण कोयला निकालने गए कई लोग बुधवार रात से ही इसमें फंसे हुए हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक जिस समय यह दुर्घटना हुई उस समय लगभग 100 मजदूर खदान के अंदर थे. वर्ष 1970 में ही बंद घोषित होने के बावजूद इस खदान से अवैध खनन जारी था. निराशा झारखंड की सीमा से सटी इस खदान के पास दामोदर और बराकर नदी आपस में मिलती हैं. जल स्तर बढ़ने के कारण दोनों नदियों के संगम से थोड़ा पहले बनाए गए एक बाँध से पानी छोड़ा गया था जिसके कारण खदान में पानी भर गया. स्थानीय पत्रकार सलमान रावी के मुताबिक पाँच दिनों के बाद भी इसमें फंसे लोगों के जीवित बचने की संभावना कम ही है. खुद खान मंत्री शिबू सोरेन ने उन गाँवों का भी दौरा किया जहाँ के लोग इस खान में फंसे हुए हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह की दुर्घटना रोकने के लिए ग़रीब गाँववालों को शिक्षा और रोजगार देने की योजना बनाई जाएगी. कोयला मंत्री ने कहा, "कोयला माफिया ग़रीब मजदूरों का शोषण करता है. हम इससे निपटने के लिए सहकारी संस्था बनाएंगे और मजदूरों को खनन का अधिकार देंगे." | इससे जुड़ी ख़बरें तीन दिन बाद भी लोग खदान में फँसे हैं05 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस खदान दुर्घटना: शिबू सोरेन दौरा करेंगे04 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस कोयला खदान में पानी,लोग फँसे 03 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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