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अफ़गानिस्तान में हिंसक घटनाएँ, कई मरे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़गानिस्तान के दक्षिणी हिस्से में हिंसा बढ़ गई हैं. गुरूवार को कंधार प्रांत में आत्मघाती कार बम हमले में 21 लोग मारे गए, वहीं हेलमंद में हुई लड़ाई में दस तालेबान लड़ाके मारे गए हैं. अफ़गानिस्तान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता यूसुफ़ स्तानिज़ई ने कहा कि एक कार कंधार के पंजवई बाज़ार में घुसी और उसमें विस्फोट हो गया. उन्होंने कहा, "इस हमले में कुछ बच्चों समेत 21 निर्दोष नागिरक मारे गए हैं और 13 अन्य घायल हुए हैं." कंधार में ही उत्तरी एटलांटिक संधि संगठन यानी नाटो सैनिकों को ले जा रही गाड़ी सड़क के नीचे रखे बम की चपेट में आ गई जिसमें एक नाटो सैनिक की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया. कनाडा की अगुआई में नाटो की सेना ने इसी हफ़्ते दक्षिणी अफ़गानिस्तान में कमान संभाली है. कंधार से ही सटे हेलमंद प्रांत में तैनात अंतरराष्ट्रीय सेना और अफ़गान सुरक्षाबलों ने तालेबान लड़ाकों के ठिकाने पर हमला किया जिसमें कम से कम 10 तालेबान लड़ाके मारे गए. दक्षिणी अफ़गानिस्तान तालेबान का गढ़ रहा है. यहाँ इस साल मई के बाद से चरमपंथी हिंसा तेज़ हुई है जिसमें सैंकड़ों लोग मारे गए हैं. नाटो के 8000 जवान अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता बल के रूप में छह प्रांतों, देकुंदी, हेलमंद, कंधार, निमरोज़, उरुज़गान और ज़ाबुल में तैनात किए गए हैं. पहली बार ब्रिटेन और कनाडा के नेतृत्व में नाटो की सेना यूरोप के बाहर तैनात की गई है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'बीस संदिग्ध तालिबान लड़ाके मारे गए'30 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस दो अफ़ग़ान शहरों पर सेना का नियंत्रण19 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस ब्रितानी सेना का सबसे बड़ा अभियान शुरु15 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस अफ़गानिस्तान में 19 'तालेबान' मारे गए13 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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