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तारबंदी के बावज़ूद हो रही है घुसपैठ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पिछले कुछ समय से लगातार पाकिस्तान से लगने वाली सीमा से घुसपैठ की ख़बरें आती रही हैं. लेफ्टिनेंट जनरल तेज कुमार सप्रू मानते हैं कि हर वर्ष मई से लेकर अक्टूबर के बीच पाकिस्तान की सीमा से होने वाली घुसपैठ बढ़ जाती है. इसके दो कारण है एक तो गर्मी के मौसम में पीर पंचाल पहाड़ियों में बर्फ का पिघलना और दूसरा नियंत्रण रेखा के दोनों ओर होने वाली मक्के की फसल का बढ़ना. बीबीसी संवाददाता बीनू जोशी से बातचीत में जनरल सप्रू ने कहा कि वर्ष 2002 में तारबंदी होने से पहले प्रतिवर्ष घुसपैठियों की संख्या एक हज़ार से भी अधिक रहती थी, वहीं इस वर्ष घुसपैठ की पांच से सात कोशिशें हुई हैं जिनमें से 20 या 22 घुसपैठिए इस ओर आने सफल हुए और 14 सुरक्षाकर्मियों के साथ मुठभेड़ में मारे गए. पेश है जनरल सप्रू से हुई बातचीत के अंश.. क्या कारण है कि तारबंदी होते हुए भी घुसपैठ की कोशिशें होती हैं और इसे रोकने के लिए क्या किया जा रहा है? तारबंदी तो है मगर उसकी भी निगरानी करनी पड़ती है. नियंत्रण रेखा पर सैनिकों की कमी के कारण हम हर मीटर तार की निगरानी नहीं कर पाते हैं. नियंत्रण रेखा पर तैनात बटालियनों में से कुछ को रेखा के उपर और कुछ को तार से तीन या चार किलोमीटर पीछे रखा जाता है. सैनिकों की कमी के चलते नियंत्रण रेखा के हर हिस्से पर मोबाइल गस्त दल नज़र रख पाए, ऐसा संभव नहीं है. कई बार घुसपैठिए इसका फ़ायदा उठा लेते हैं. घुसपैठ की कोशिशों के साथ-साथ राज्य में चरमपंथी हिंसा भी बढ़ी हैं इसका क्या कारण है? मैं नहीं मानता कि हिंसा की वारदातों में बढ़ोत्तरी हुई है बल्कि आतंकवाद हर लिहाज़ से कम हुआ है. इतना ज़रूर है कि पिछले दिनों कुछ आतंकी वारदातें ज़रूर हुई हैं. इसके भी कई कारण हैं, जैसे प्रधानमंत्री की गोलमेज वार्ता और फिर गर्मी के महीनों में कश्मीर में पर्यटकों का अधिक संख्या में आना भी चरमपंथियों से बर्दाश्त नहीं होता. वो अपनी उपस्थिति दर्ज़ करवाने के लिए भी आतंकी हमले करते हैं. अगर जम्मू क्षेत्र के डोडा ज़िले में कुलहंद और उधमपुर ज़िले के बसंतगढ के नरसंहार को छोड़ दें तो इस वर्ष जहां चरमपंथी हिंसा में 30 से 40 लोग मारे गए हैं वहीं पिछले वर्ष ये संख्या 100 से ऊपर थी. इस वर्ष 12 जवान शहीद हुए हैं जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 25 से 30 थी. देखने में आ रहा है कि सीमावर्ती क्षेत्र जैसे पुंछ और राजौरी में चरमपंथी संचार के लिए पाकिस्तानी मोबाइल कार्डों का प्रयोग कर रहे हैं. इस पर आप क्या कहना चाहते हैं? पहले घुसपैठिए या फिर चरमपंथी आपस में तालमेल के लिए रेडियो या वायरलेस संचार व्यवस्था का इस्तेमाल करते थे जिसका पता चल जाता था और हम उनके संदेश आसानी से पकड़ लेते थे. मगर ये लोग अब मोबाइल फोन का प्रयोग कर रहे हैं जिससे इनकी संचार व्यवस्था मजबूत हुई है. इन लोगों को ये मदद नियंत्रण रेखा के उस पार से भी मिल रही है. पाकिस्तान ने समानी और हजीरा जैसे स्थानों पर मोबाइल टावरों को नियंत्रण रेखा के क़ाफी नज़दीक लगाया है. इनके सिग्नल 20 से 50 किलोमीटर भारतीय इलाक़े में आ रहे हैं जिसका लाभ ये चरमपंथी उठाते हैं. हमने कई पाकिस्तानी सिम कार्ड ज़ब्त किए हैं. ऐसे कार्डों का प्रयोग रोकने के उपाय हम खोज रहे हैं ताकि तरमपंथियों के आपसी तालमेल को रोका जाए. | इससे जुड़ी ख़बरें कश्मीर में बम धमाके, आठ मरे11 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस पर्यटकों पर हमलों का विरोध14 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस धमाकों से पर्यटन का धंधा हुआ मंदा17 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस प्रमुख 'लश्कर चरमपंथी' गिरफ़्तार 22 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस जम्मू में पर्यटकों की अभी भी कमी नहीं25 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस कश्मीर में 'फर्जी मुठभेड़' मामले की जाँच27 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस कड़ी सुरक्षा के बीच कश्मीर पहुँचे कलाम27 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस 'नियंत्रण रेखा पर आर्थिक क्षेत्र बने'28 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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