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गुरुवार, 27 जुलाई, 2006 को 10:08 GMT तक के समाचार
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परमाणु सहमति प्रतिनिधि सभा में मंज़ूर
मनमोहन सिंह और जॉर्ज बुश ने समझौते पर हस्ताक्षर किए थे
इस समझौते को भारत-अमरीका रिश्तों में राष्ट्रपति बुश की महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है
अमरीकी संसद के निचले सदन यानी प्रतिनिधि सभा ने भारत के साथ परमाणु सहमति को भारी बहुमत से साथ मंज़ूरी दे दी है.

अपेक्षा से अधिक लंबी चली बहस के बाद 359 सांसदों ने इस सहमति के पक्ष में मतदान किया जबकि 68 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया.

अब ये प्रस्ताव अमरीकी संसद के उच्च सदन सीनेट की मंज़ूरी के लिए जाएगा. सीनेट की मंज़ूरी के बाद ही इस सहमति को भारत और अमरीका के बीच द्विपक्षीय समझौते में तब्दील किया जा सकेगा.

संसद की मंज़ूरी दरअसल अमरीका के तीन दशक से भी अधिक पुराने क़ानून में संशोधन के लिए ज़रूरी है जिसके तहत भारत को परमाणु ईंधन और तकनीक देने पर रोक लगा दी गई थी.

दोनों देशों के बीच यदि समझौता हो जाता है तो अमरीका और परमाणु सामग्री आपूर्ति करने वाले कई देश भारत को असैनिक मकसदों के लिए परमाणु ईंधन और तकनीक दे सकेंगे.

दूसरी ओर भारत को अपने कुछ परमाणु संयंत्रों के निरीक्षण की इजाज़त देनी होगी.

अमरीकी प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ़ रिप्रेंज़ेटेटिव की इस मंज़ूरी को बुश प्रशासन, अमरीका के भारतीय समुदाय और भारत की यूपीए सरकार के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है.

मंज़ूरी

बुधवार को जब भारत के साथ सहमति पर अमरीकी प्रतिनिधि सभा ने बहस शुरु की तो यह लगभग तय माना जा रहा था कि इसे मंज़ूरी मिल जाएगी.

 हमने आज जो किया है उसे इतिहास एक ऐसे दिन के रुप में याद करेगा जब भारत और अमरीका के संबंधों में एक बड़ा परिवर्तन आया
टॉम लैंटॉस, डेमोक्रेट सांसद

लेकिन तब किसी को उम्मीद नहीं थी कि इसे इतने भारी बहुमत से मज़ूरी मिलेगी.

रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों की पार्टियों के सांसदों ने ज़ोरदार बहस के बाद इस सहमति के पक्ष में मतदान किया.

बीबीसी संवाददाता शाज़ेब जिलानी के अनुसार इस सहमति के ख़िलाफ़ मतदान करने वाले सांसद भी दोनों ही दलों के थे.

इस सहमति का विरोध करने वालों ने कुछ संशोधन भी रखे थे जिन्हें संसद ने नामंज़ूर कर दिया.

इसमें एक संशोधन तो यह था कि भारत की परमाणु गतिविधियों को सीमित किया जाए क्योंकि इससे परमाणु प्रसार की आशंका है.

बुश-मनमोहन
मार्च में राष्ट्रपति बुश की भारत यात्रा के दौरान इस सहमति को अंतिम रुप दिया गया था

जबकि एक संशोधन में यह कहा गया था कि भारत के साथ परमाणु समझौते को तब तक स्थगित रखा जाना चाहिए जब तक कि भारत ईरान की परमाणु गतिविधियाँ रोकने में अमरीका की पर्याप्त मदद नहीं करता.

बुधवार को अमरीकी कांग्रेस की मंज़ूरी को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारत ने अब तक परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और अमरीका के लिए इस संधि का सदस्य रहते हुए आसान नहीं था कि वह भारत की मदद करता.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार अमरीकी प्रतिनिधि सभा में कैलिफ़ोर्निया के डेमोक्रेट सदस्य और संसद की अंतरराष्ट्रीय मामलों की समिति के सदस्य टॉम लैंटॉस ने कहा, "हमने आज जो किया है उसे इतिहास एक ऐसे दिन के रुप में याद करेगा जब भारत और अमरीका के संबंधों में एक बड़ा परिवर्तन आया."

उन्होंने कहा, "अमरीकी कांग्रेस ने निश्चित तौर पर संकेत दे दिए हैं कि भारत और अमरीका के बीच होने वाली बातचीत पर शीतयुद्ध काल का असर अब ख़त्म हो गया है."

लंबी यात्रा

बुधवार को अमरीकी प्रतिनिधि सभा से मिली मंज़ूरी भारत के साथ परमाणु समझौते की दिशा में एक और क़दम है.

परमाणु संयंत्र
भारत असैनिक क्षेत्र में परमाणु सहयोग चाहता है

लेकिन अभी इसके कई और अहम पड़ाव हैं.

इसके बाद परमाणु सहमति या इसके लिए क़ानून संशोधन को अमरीका के उच्च सदन सीनेट की मंज़ूरी ज़रूरी है.

संभावना है कि सीनेट की मंज़ूरी सितंबर तक मिल सकेगी.

इसके बाद भारत और अमरीका द्विपक्षीय समझौते को अंतिम रुप देकर उस पर हस्ताक्षर करेंगे और एक बार फिर अमरीकी संसद के दोनों सदनों में इसे मंज़ूरी के लिए रखा जाएगा.

इस बीच भारत को परमाणु सामग्री की आपूर्ति करने वाले 45 देशों के समूह से चर्चा करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि भारत को परमाणु ईंधन और तकनीक आपूर्ति के नियम कैसे होंगे.

इसके अतिरिक्त भारत को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ अपने परमाणु ठिकानों की जाँच की व्यवस्था को अंतिम रुप देना होगा.

बीबीसी के वॉशिंगटन संवाददाता शाज़ेब जिलानी के अनुसार समझौता होने और उसके अमल में आने के लिए अभी सात-आठ माह से अधिक का समय लग सकता है.

लेकिन उनका कहना है कि बुधवार को अमरीकी कांग्रेस की मंज़ूरी निश्चित तौर पर भारतीयों के लिए और अमरीका में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए ऐतिहासिक दिन है क्योंकि अमरीका ने साफ़ तौर पर भारत को आने वाले दिनों की महाशक्तियों के रुप में मंज़ूरी दे दी है.

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