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रविवार, 16 जुलाई, 2006 को 19:32 GMT तक के समाचार
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महल बचाने की मुहिम में लगे निज़ाम

मनोलिया
मनोलिया का कहना है कि निज़ाम ने उनकी बेटी को एक महल देने का वादा किया था
भारत में हैदराबाद के आख़िरी निज़ाम मुकर्रम जाह बहादुर तीसरी तलाक़शुदा बीवी से अदालती मुक़दमा हारने के बाद अब महलों के मालिकाना हक़ के लिए लड़ रहे हैं.

आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट ने पहली बार एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सरकारी अधिकारियों से निज़ाम के दो मुख्य महलों का मुआयना करने को कहा था.

अदालती फ़ैसले के मद्देनज़र हैदराबाद के जिलाधिकारी और पुरातत्व विभाग के निदेशक ने महलों का मुआयना किया और वहाँ के रत्नाभूषणों का जायज़ा लिया.

चिरान महल के भीतर 1909 में बनी रॉल्स रायस और कुछ अन्य कारें पाईं गईं जिनकी हालत बहुत ख़राब थी.

इसके अलावा एक निसान, एक काले रंग की फोर्ड और दूसरी ऐसी ही कई गाड़ियाँ सुरक्षित थी.

दूसरे महल में अधिकारियों को बड़े बड़े झूमर, फानूस, छह बग्गियाँ और दूसरे रत्नाभूषण मिले.

हक़ पर सवाल

महल के मुआयने की इस सरकारी कार्रवाई ने शाही ख़ानदान के गलियारों में काफ़ी बेचैनी पैदा कर दी है.

महल में दाख़िले के समय सरकारी अधिकारियों की वहाँ के सुरक्षाकर्मियों से बहस हो गई जिनका कहना था कि यह निज़ाम की निजी मल्कियत है और उसमें कोई भी बिना आज्ञा के प्रवेश नहीं कर सकता.

निज़ाम के मामाले की पैरवी कर रहे लंदन के वकील विजय शंकर दास ने हाईकोर्ट में एक याचिका दाख़िल की है.

इसमें कहा गया है कि दोनों महलों और उनमें मौजूद तमाम रत्नाभूषण निज़ाम की संपत्ति हैं और वो इसकी सुरक्षा कर सकते हैं.

इस मामले में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि निज़ाम को अपने महल को ‘हैरीटेज होटल’ में बदलने का पूरा अधिकार है और यह काम जारी है.

लगभग 400 एकड़ से भी ज़्यादा क्षेत्र में फैले चिरान महल के आसपास का 390 एकड़ का इलाक़ा राज्य सरकार ने अपने नियंत्रण में ले लिया है और उसे क़ौमी पार्क का दर्जा दे दिया है.

अब निज़ाम का निजी महल कुल दस एकड़ से भी कम इलाक़े तक सीमित रह गया है.

ग़ौरतलब है कि अदालत ने निज़ाम को उनकी तीसरी तलाकशुदा बीवी मनोलिया ओनूर को 14 करोड़ रुपए बतौर जुर्माना देने का आदेश दिया है.

मनोलिया ओनूर

तुर्की सुंदरी रह चुकीं मनोलिया ओनूर ने अदालत को बताया था कि जब 1994 में उनका तलाक़ हुआ तो निज़ाम ने उन्हें साढ़े तीन मिलियन डॉलर देने और उनकी बेटी को एक महल उपहार में देने का वादा किया था.

शाही ख़ानदान के जानकारों के अनुसार निज़ाम ने निचली अदालत के इस फ़ैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने का निर्णय लिया है क्योंकि उनका कहना है कि वो ओनूर से किए गए अपने वादे पूरे कर चुके हैं.

निज़ाम अब तक पाँच बार शादी कर चुके हैं जिनमें से कोई भी शादी सफ़ल नहीं रही.

उधर दो महलों में सरकारी दख़ल को शाही ख़ानदान महलों और दूसरे रत्नाभूषण छीन लेने की सरकारी साज़िश के तौर पर देखता है.

महल के जानकारों का कहना है कि निज़ाम 30-35 वर्षों तक अलग अलग देशों की ख़ाक छानने के बाद अब वापस घर आना चाहते हैं.

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