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माइक्रो-चिप परियोजना हैदराबाद में | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार ने देश में माइक्रो-प्रोसेसर और सिलिकॉन चिप बनाने की पहली बड़ी परियोजना हैदराबाद में लगाए जाने की इजाज़त दे दी है. तीन अरब डॉलर की ये परियोजना भारत के लिए अहम है क्योंकि चाहे भारतीय सूचना तकनीक उद्योग में तो दुनिया में जाना-माना है लेकिन कंप्यूटर बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली कई चीज़े भारत विदेशों से आयात करता है. इस परियोजना के तहत 20 माइक्रो-प्रोसेसर और सिलिकॉन चिप बनाने वाले कारखाने लगाए जाएँगे. आँध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी ने पत्रकारों को बताया कि 'फ़ैब सिटी' के नाम से हैदराबाद के पास 1200 एकड़ भूमि में शुरु होने वाली ये निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की संयुक्त परियोजना होगी. इस परियोजना की मुख्य प्रोत्साहक 'सैम इंडिया' के प्रमुख विनोद अग्रवाल का कहना था कि इसमें दो चरण में तीन अरब डॉलर का पूँजी निवेश होगा और इससे दस हज़ार नौकरियाँ पैदा होंगी. 'सैम इंडिया' प्रवासी भारतीयों की कंपनियों का संघ है और इसके पास अमरीकी कंपनी एडवांस्ड माइक्रो डिवाइसेज़ इनकॉर्पोरेटिड का कंप्यूटर, मोबाइल फ़ोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाने का लाइसेंस है. अधिकारियों का मानना है कि इस परियोजना से भारत मोबाइल फ़ोन, उच्च तकनीक के टीवी, डीवीडी जैसे सामान बनाने में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो जाएगा. अग्रवाल का कहना है कि वर्ष 2015 तक ये क्षेत्र 22.6 अरब डॉलर का हो जाएगा और इसमें 26 लाख नई नौकरियाँ पैदा होंगी. | इससे जुड़ी ख़बरें भारत में कंप्यूटर बिक्री 36 प्रतिशत बढ़ी06 जनवरी, 2006 | कारोबार संदेश भेजना आसान होगा20 सितंबर, 2003 | विज्ञान कंप्यूटर तोड़ो, पुरस्कार पाओ29 सितंबर, 2003 | पहला पन्ना कंप्यूटर वायरस की उम्र बीस साल हुई11 नवंबर, 2003 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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