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'भारत-पाक शांति वार्ता नहीं रुकनी चाहिए' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने कहा है कि मुंबई धमाके के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच जारी शांति वार्ता नहीं रुकनी चाहिए. सीपीआई का कहना है कि अगर शांति वार्ता रुकी तो इसका मतलब 'आतंकवादियों' के हाथ में खेलना हुआ. सीपीआई नेता डी राजा और गुरुदास दास गुप्ता ने कहा कि शांति वार्ता जारी रहनी चाहिए. उन्होंने कहा, "हम इस बात से सहमत नहीं कि शांति वार्ता रुकनी चाहिए. मुंबई में आतंकवादी हमला शांति वार्ता को पटरी से उतारने और देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने के लिए किया गया है." सीपीआई नेताओं ने कहा कि 'आतंकवादियों' को अपने मक़सद में क़ामयाब होने का मौक़ा नहीं देना चाहिए. कार्रवाई लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मनमोहन सिंह सरकार को पाकिस्तान से कड़ाई से यह कहना चाहिए कि वह अपने यहाँ सभी 'आतंकवादी' कैंप को नष्ट करे. सीपीआई ने मुंबई धमाके के मामले में ख़ुफ़िया एजेंसियों के साथ समन्वय न कर पाने के लिए गृह मंत्रालय की आलोचना की. उन्होंने कहा कि देश में कई ख़ुफ़िया एजेंसियाँ हैं लेकिन उन्हें मुंबई धमाके के बारे में पता नहीं चला. उन्होंने आरोप लगाया कि ख़ुफ़िया एजेंसियों के बीच आपस में कोई समन्वय नहीं. सीपीआई नेताओं ने सवाल उठाते हुए कहा कि इस स्थिति में गृह मंत्रालय क्या कर रहा है. सीपीआई नेता गुरुदास दास गुप्ता और अज़ीज़ पाशा ने हाल ही में मुंबई का दौरा किया और वहाँ की स्थिति की समीक्षा की.. इन नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी की भी कड़ी आलोचना की और कहा कि पार्टी धमाके से राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है. | इससे जुड़ी ख़बरें मुंबई धमाके: गुप्तचर एजेंसियों पर सवाल14 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान को प्रधानमंत्री की चेतावनी14 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस 'मदद के लिए तैयार' मुशर्रफ़14 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस भारत के आरोप बेबुनियाद: पाकिस्तान14 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस हमें बेवजह बदनाम किया जा रहा है:सीमी13 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस 'नापाक इरादे कभी कामयाब नहीं होंगे'12 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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