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आईएईए के साथ बैठक 'उपयोगी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अधिकारियों और भारत के अधिकारियों के बीच असैनिक परमाणु कार्यक्रम पर शनिवार को हुई बातचीत को उपयोगी बताया गया है. दिल्ली में हुई इस बैठक के बाद जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि बातचीत में कई महत्वपूर्ण और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की गई. यह भी कहा गया है कि इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की सहूलियत के हिसाब से तारीख़ तय करके आगे भी बातचीत होगी. बैठक में देश के असैनिक परमाणु कार्यक्रम पर लागू होने वाले नियमों और अंतरराष्ट्रीय मापदंडों पर विचार-विमर्श किया गया. ग़ौरतलब है कि भारत और अमरीका के बीच जुलाई 2005 में जो परमाणु सहमति हुई थी उसमें आईएईए की ओर से भारत पर लागू होने वाले नियमों का भी प्रावधान था और यह बैठक उसी दिशा में एक क़दम है. अमरीका और भारत के बीच हुई परमाणु सहमति में कहा गया है कि आईएईए को भारत के लिए एक विशेष निगरानी समझौता तैयार करना होगा. इसके बाद भारत के 35 परमाणु संयंत्र और परमाणु सामग्री निगरानी में आ जाएंगे. इसकी ज़रूरत इसलिए भी है क्योंकि भारत एक ऐसा देश है जो परमाणु संपन्न है और उसने परमाणु निषेध संधि पर हस्ताक्षर भी नहीं किए हैं. आगे का रास्ता आईएईए के पास फिलहाल निगरानी के दो मानक हैं. एक वह जो परमाणु संपन्न देशों पर लागू होता है और दूसरा वो जिसके तहत ऐसे देश आते हैं जो परमाणु संपन्न नहीं हैं. भारत में परमाणु और सामरिक मामलों के विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर ब्रह्मा चेलानी कहते हैं, "भारत ने एक बात तो मान ली है कि उसके परमाणु कार्यक्रम हमेशा आईएईए की निगरानी में रहेंगे पर परमाणु संपन्न देशों के साथ निगरानी में लचीला रुख़ अपनाया जाता है और भारत का कहना है कि उसके साथ भी लचीला रुख़ अपनाया जाना चाहिए." शनिवार को ख़त्म हुई विशेषज्ञ और अधिकारी स्तर की बैठक में जो सहमतियाँ बनी हैं उन्हें आईएईए के 56 देशों वाले निदेशक मंडल से पारित करवाना होगा. विशेष बात तो यह है कि पिछले वर्ष 18 जुलाई की सहमति में अनुसार भारत को अपने परमाणु कार्यक्रम को दो हिस्सों, सैनिक और असैनिक में बाँटना था और भारत ने इस वर्ष मार्च में ऐसा कर भी लिया था. इसके बाद अमरीकी कांग्रेस को वहाँ का कानून बदलना था ताकि भारत से परमाणु व्यापार किया जा सके. इसके बाद ही आईएईए से समझौता होना था पर हाल-फिलहाल में स्थिति बदली भी है. अब अमरीकी कांग्रेस से इस परमाणु समझौते को पारित करवाने और अमरीकी कानून में बदलाव के पहले आईएईए के साथ समझौता ज़रूरी हो गया है इसलिए यह बैठक महत्वपूर्ण हो गई है. | इससे जुड़ी ख़बरें परमाणु सहमति को सीनेट की मंज़ूरी29 जून, 2006 | भारत और पड़ोस परमाणु समझौते पर बात आगे बढ़ी27 जून, 2006 | भारत और पड़ोस अमरीकी कांग्रेस में परमाणु मुद्दे पर बहस27 जून, 2006 | भारत और पड़ोस श्याम सरन ने रुख़ कड़ा किया01 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस 'भारत को परमाणु तकनीक देना उचित'22 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस 'भारत कोई नियम नहीं तोड़ रहा है'15 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस रूस भारत को यूरेनियम बेचेगा14 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस 'सामरिक कार्यक्रम पर कोई अंकुश नहीं'07 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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