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अमरीकी कांग्रेस में परमाणु मुद्दे पर बहस
भाभा परमाणु संयंत्र
भारत में ऊर्जा की बढ़ती ज़रूरतों को देखते हुए परमाणु ऊर्जा को एक विकल्प माना जा रहा है
भारत-अमरीका के बीच होने वाले प्रस्तावित परमाणु समझौते पर अमरीकी कांग्रेस में मंगलवार से विचार विमर्श शुरु हो गया है.

मार्च में हुई परमाणु सहमति पर इस हफ़्ते अमरीकी सिनेट विदेश संबंध समिति और हाउस अंतरराष्ट्रीय संबंध समिति में बहस होगी.

विचार विमर्श के बाद इस बात पर मतदान होगा कि क्या भारत के साथ हुई परमाणु सहमति को स्वीकृति दी जाए, ख़ासकर तब जब भारत अपने परमाणु संयंत्रों की पूर्ण रूप से मुआयना करने की अनुमति नहीं देता.

भारत और अमरीका की सरकारें परमाणु समझौते को काफ़ी अहम मानती हैं.

जबकि आलोचकों का कहना है कि इस समझौते के होने से परमाणु प्रसार को बढ़ावा मिलेगा.

आलोचकों के मुताबिक समझौते से भारत में परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ेगी और इससे ईरान जैसे देशों को ग़लत संदेश जाएगा.

विवाद

अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने मार्च में भारत का दौरा किया था. इसी दौरान दोनों देशों की बीच परमाणु मुद्दे पर सहमति हुई थी.

सहमति के अनुसार अमरीका भारत को परमाणु तकनीक उपलब्ध करवाएगा और बदले में भारत अपने परमाणु संयंत्रों के मुआयने की अनुमति देगा. हालांकि भारत के परमाणु हथियार मुआयने की परिधि से बाहर रहेंगे.

भारत के साथ हुई ये परमाणु सहमति अमरीका की अब तक की नीति के ख़िलाफ़ है.

अब तक अमरीका भारत के साथ परमाणु मुद्दे पर सहयोग से दूर रहा है क्योंकि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं.

वाशिंगटन में बीबीसी संवाददाता शाहज़ेब जिलानी का कहना है कि समझौते के पक्ष में मतदान के लिए समर्थन जुटाने की कोशिशें ज़ोर शोर से चल रही हैं.

संवाददाता के मुताबिक इस बात को लेकर मत बटा हुआ है कि क्या बुश प्रसाशन के पास समझौते के पक्ष में पर्याप्त समर्थन है या नहीं.

पिछले हफ़्ते अमरीका के उप राष्ट्रपति डिक चेनी ने कहा था कि वे उम्मीद करते हैं कि कांग्रेस जल्द ही परमाणु मुद्दे पर विधेयक पारित कर देगी.

डिक चेनी का कहना था कि भारत के साथ परमाणु सहमति 'राष्ट्रपति बुश के दूसरे कार्यकाल के सबसे अहम रणनीतिक क़दमों' में से एक है.

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