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सोमवार, 03 जुलाई, 2006 को 13:10 GMT तक के समाचार
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यौनकर्मियों की संख्या में भारी वृद्धि

यौनकर्मी
ग़रीबी के साथ साथ सेक्स के प्रति बदलता नज़रिया भी वेश्यावृत्ति को बढ़ावा देता है
भारत सरकार की ओर से कराए गए अध्ययन के मुताबिक देश में वेश्यावृत्ति तेज़ी से बढ़ रही है. ग़रीबी और अशिक्षा को इसका मुख्य कारण बताया गया है.

अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 1997 में भारत में यौनकर्मियों की संख्या लगभग 20 लाख थी जो 2003-04 में बढ़ कर लगभग 30 लाख हो गई.

महिला और बाल विकास विभाग के लिए ग्राम नियोजन केंद्र ने दो वर्षों के अध्ययन के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की है.

रिपोर्ट तैयार करने में अहम भूमिका निभाने वाले केके मुखर्जी और सुतापा मुखर्जी का मानना है कि शिक्षा की कमी और ग़रीबी के कारण इस धंधे को बढ़ावा मिल रहा है.

केके मुखर्जी कहते हैं "अशिक्षा और ग़रीबी के अलावा सेक्स के प्रति बदलते नज़रिए से भी इस पेशे को बढ़ावा मिलता है. लोगों में कई महिलाओं के साथ शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा तेज़ हुई है."

विदेशी लड़कियाँ

केके मुखर्जी ने बताया कि आंध्रप्रदेश और पश्चिम बंगाल में यौनकर्मियों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है. इन दोनों राज्यों में देश के कुल यौनकर्मियों की 26 फ़ीसदी संख्या वेश्यावृत्ति करने पर मजबूर हैं.

 अशिक्षा और ग़रीबी के अलावा सेक्स के प्रति बदलते नज़रिए से भी इस पेशे को बढ़ावा मिलता है. लोगों में कई महिलाओं के साथ शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा तेज हुई है
केके मुख़र्जी

रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी लड़कियाँ भी इस पेशे से जुड़ी हुई हैं. हालाँकि वह अपना घर पश्चिम बंगाल ही बताती हैं.

नेपाल से भी भारी संख्या में लड़कियाँ भारत आ रही हैं और ये वेश्यावृत्ति से जुड़ रही हैं.

बांग्लादेश और नेपाल की इन लड़कियों को दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में भेजा जाता है.

उम्र

रिपोर्ट के अनुसार 90 फ़ीसदी यौनकर्मियों की उम्र 15 से 35 वर्ष के बीच है.

हालाँकि बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराँचल में 12 से 15 वर्ष की लड़कियों को भी इस पेशे में धकेल दिया जाता है.

केके मुख़र्जी के मुताबिक वेश्यावृत्ति के पेशे में कम उम्र की लड़कियों की अधिक माँग है.

लगभग 35 फ़ीसदी महिलाओं ने बातचीत के दौरान स्वीकर किया कि उन्होंने 18 वर्ष की उम्र से पहले ही वेश्यावृत्ति शुरु कर दी थी.

नज़रिया

मजबूरी या पैसे की लालच में वेश्यावृत्ति कर रही महिलाएँ किसी भी सूरत में अपनी बेटियों को इस धंधे में नहीं लाना चाहतीं.

अध्ययन में जिन 9500 यौनकर्मियों से बात की गई उनमें से 45 फ़ीसदी अपने बच्चों को साथ रखते हैं लेकिन बाकी अपने बच्चों को कोठे की दुनिया से दूर किसी बोर्डिंग स्कूल या रिश्तेदार के यहाँ रख कर पढ़ा रहे हैं.

केके मुखर्जी कहते हैं कि नई लड़कियाँ वेश्यावृत्ति की दुनिया में न आएँ इसे सुनिश्चित करना चाहिए. इसके लिए ग़रीबी, अशिक्षा जैसी बुनियादी समस्याओं पर ध्यान देने की ज़रूरत है.

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