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पाकिस्तानी हिंदुओं के पक्ष में आग्रह | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पश्चिमी राज्य राजस्थान में पाकिस्तान से आए हिंदुओं की नागरिकता का मुद्दा फिर उठ रहा है. राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने केंद्र सरकार से ऐसे पाकिस्तानी नागरिकों को भारतीय नागरिकता देने का आग्रह किया है. केंद्र सरकार इससे पूर्व विशेष अभियान के तहत पाकिस्तान से आए कई हज़ार हिंदुओं को भारतीय नागरिकता प्रदान कर चुकी है. इसके लिए नागरिकता शुल्क में भी कमी की गई थी लेकिन इस अभियान की समयसीमा 28 फरवरी 2006 को समाप्त हो गई. इसके साथ ही नागरिकता आवेदन शुल्क की बढ़ी हुईं दरें भी लागू हो गईं हैं. इसका भारतीय नागरिकता पाने की इच्छा रखने वाले पाकिस्तानी हिंदू विरोध कर रहे हैं. अनुरोध राज्य के गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने बीबीसी से कहा कि राजस्थान ने केन्द्र सरकार से आग्रह किया है कि नागरिकता से वंचित पाकिस्तान के इन हिंदुओं को पहले की तरह ही उदार प्रक्रिया अपनाकर भारतीय नागरिकता दी जाए. सरकारी अधिकारियों के अनुसार फरवरी 2004 से फरवरी 2006 के बीच लगभग 13 हज़ार पाकिस्तानी हिंदुओं को नागरिकता दी जा चुकी है. इन हिंदुओं का कहना है कि वे पाकिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न का शिकार रहे हैं और हालात से परेशान होकर भारत आए हैं. इनका प्रतिनिधित्व करने वाले पाक विस्थापित संघ के अनुसार अभी कोई तीन हज़ार पाकिस्तानी हिंदू भारतीय नागरिकता पाने की कतार में खड़े हैं. ये लोग वैध यात्रा दस्तावेज़ के साथ भारत आए और फिर लौटेने से इंकार कर दिया. विस्थापन का दर्द पाक विस्थापित संघ के अध्यक्ष हिंदू सिंह सोढा कहते हैं “ नागरिकता शुल्क इतना ज़्यादा है कि कोई भी विस्थापित आवेदन करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है. नागरिकता शुल्क की मौजूदा व्यवस्था के तहत हर आवेदन के साथ लागू शुल्क को कई श्रेणियों में बाँट गया है जो तीन हज़ार से 15 हज़ार के बीच है. सोढा कहते हैं, “ज़्यादातर पाकिस्तानी हिंदू गरीब हैं और कमज़ोर वर्ग से आते हैं. ऐसे में नागरिकता शुल्क की दरें बढ़ाना अन्याय होगा.” ” इन हिंदुओं में अधिकांश राजस्थान से सटे पाकिस्तानी सूबा सिंध से आये हैं, जबकि कुछ वहाँ के पंजाब प्रांत से भी आए हैं. पाकिस्तान से आए अमरलाल कहते हैं, “जब भी धार्मिक उन्माद की आंधी उमड़ती है कट्टरपंथी उन्हें निशाना बनाते हैं. बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद अल्पसंख्यक हिंदुओं को मज़हबी ताकतों का गुस्सा झेलना पड़ा था.” नागरिकता शुल्क छह साल पहले भारत आए अमरलाल नागरिकता शुल्क पर कहते हैं “मेरे परिवार में 15 सदस्य हैं. शुल्क की दरें इतनी महंगी है कि वे ख़ुद को गिरवी रखकर भी इतना पैसा नहीं जुटा सकते.” विस्थापन का दर्द झेल रहे इन हिंदुओं के नेता हिंदू सिंह सोढा कहते हैं, “ये नागरिकता विहीन की श्रेणी में आते हैं. अपने गाँव, घरों से बेदखल कई पाकिस्तानी हिंदू राज्य के जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और जालौर जैसे शहरों में रह रहे हैं.” कहने को तो भारतीय नागरिकता का प्रमाण पत्र कागज़ का महज एक टुकड़ा होगा, लेकिन इन विस्थापितों को लगता है कि कागज़ का यह पुर्ज़ा उनकी तक़दीर की नई इबादत लिख सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें मासूम मुईज़ श्रीनगर के रास्ते पर 03 जून, 2006 | भारत और पड़ोस प्रवासी भारतीयों को रिझाने की कोशिश08 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस दोहरी नागरिकता का सपना सच हुआ07 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस नागरिकता क़ानून में संशोधन मंज़ूर16 जून, 2005 | भारत और पड़ोस दोहरी नागरिकता का दायरा व्यापक हुआ07 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस भारतीय महिला को पाक नागरिकता मिली25 सितंबर, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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