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नागरिकता क़ानून में संशोधन मंज़ूर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार ने भारतीय नागरिकता क़ानून में संशोधन को अपनी मंज़ूरी दे दी है जिससे दोहरी नागरिकता दिए जाने का रास्ता साफ़ हो गया है. सरकार ने तय किया है कि 1950 के बाद भारत से विदेश जाने वाले लोग दोहरी नागरिकता के हक़दार होंगे लेकिन इसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश जाने वाले लोग शामिल नहीं होंगे. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फ़ैसला किया गया कि विदेश में रहने वाले पंजीकृत भारतीय नागरिकों को स्मार्ट कार्ड जारी किए जाएँगे. 1955 के भारतीय नागरिकता क़ानून में संशोधन के बिना भारत के नागरिकों को दूसरे देशों का नागरिक होने की अनुमति नहीं दी जा सकती, मौजूदा व्यवस्था ये है कि अघर कोई भारतीय किसी अन्य देश की सदस्यता लेता है तो उसे भारत की नागरिकता छोड़नी पड़ती है. इसका फ़ायदा भारत से बाहर रहने वाले लाखों भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों को मिल सकेगा जो भारत से जुड़े रहना चाहते हैं. कैबिनेट की बैठक के बाद सूचना प्रसारण मंत्री जयपाल रेड्डी ने पत्रकारों को इन फ़ैसलों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि मानसून सत्र में क़ानून में संशोधन संबंधी विधेयक को संसद में पेश किया जाएगा. पुरानी घोषणा वर्ष 2003 में ही एनडीए सरकार ने इस क़दम की घोषणा कर दी थी लेकिन उसे लागू करने की दिशा में क़ानूनी अड़चन बनी हुई है. अभी इस मुद्दे पर भी मतभेद बना हुआ था कि दोहरी नागरिकता दिए जाने की स्थिति में क्या लोगों के पास भारतीय पासपोर्ट भी होगा. अब सरकार ने तय किया है कि किसी अन्य देश की नागरिकता लेने वाले लोगों को एक स्मार्ट कार्ड दिया जाएगा जिस पर उनके बारे में जानकारियाँ अंकित होंगी और वे बिना वीज़ा के भारत जा सकेंगे. इसके अलावा, दोहरी नागरिकता वाले लोगों को भारतीय नागरिक के रूप में ज़मीन- ज़ायदाद करने और पूंजी निवेश करने की आज़ादी होगी, लेकिन वे मताधिकार का प्रयोग नहीं कर सकेंगे. मानसून सत्र में क़ानून के पारित होने के बाद दोहरी नागरिकता के अमल में आने में कितना समय लगेगा अभी यह कहना मुश्किल है. |
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