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पाकिस्तान को हार्पून मिसाइलें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में बुश प्रशासन ने कहा है कि उसने पाकिस्तान को अत्याधुनिक हार्पून मिसाइलें बेचने पर सहमति दी है जिन्हें जहाज़ों और पनडुब्बियों से भी दागा जा सकता है. बुश प्रशासन का का कहना है कि इन मिसाइलों में काम आने वाले कुछ उपकरण भी पाकिस्तान को बेचने पर सहमति हुई है जिनकी क़ीमत क़रीब 37 करोड़ 50 लाख डॉलर है. अभी इस सौदे को अमरीकी कांग्रेस की मंज़ूरी मिलना ज़रूरी है. अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने कांग्रेस को एक नोटिस भेजा है जिसमें कहा गया है कि इस रक्षा बिक्री से पाकिस्तान की मौजूदा हथियार प्रणाली में महत्वपूर्ण सुधार आएगा. पेंटागन ने कहा है कि "आतंकवाद के ख़िलाफ़ अमरीकी लड़ाई" के एक प्रमुख सहयोगी की इस तरह की मदद करने से अंततः अमरीका की ही सुरक्षा में सुधार आएगा. इस रक्षा बिक्री की देखरेख पेंटागन ही कर रहा है. अमरीकी सरकार की तरफ़ से पेंटागन ही इस तरह के बड़े रक्षा सौदों की ज़िम्मेदारी संभालता है. पेंटागन की रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने कांग्रेस को भेजे नोटिस में कहा है कि पाकिस्तान को 50 ऐसी हार्पून मिसाइलें बेची जाएंगी जिन्हें पनडुब्बियों से छोड़ा जा सकता है. इनके अलावा 50 जहाज़ों से छोड़ी जाने वाली मिसाइलें होंगी और 30 ऐसी मिसाइलें होंगी जिन्हें हवा में से ही दागा जा सकता है. हालाँकि अधिकारियों ने ज़ोर देकर यह भी कहा कि यह सौदा अभी पूरा होने से काफ़ी दूर है क्योंकि इसे कांग्रेस की मंज़ूरी मिलना ज़रूरी है. पेंटागन के एक बयान में कहा गया है, "इस प्रस्तावित सौदे से अमरीका की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति को मज़बूती मिलेगी." अमरीका ने पाकिस्तान पर से साल 2005 में हथियारों का प्रतिबंध हटाया था और उस समय दोनों देशों के बीच दोतरफ़ा रक्षा व्यापार की भी घोषणा की गई थी. इसमें मिसाइल रक्षा सहयोग, तकनीक हस्तांतरण और हथियारों के क्षेत्र में सहयोग महत्वपूर्ण थे. पाकिस्तान पर ये प्रतिबंध 1998 में तब लगाए गए थे जब पाकिस्तान ने भारत के परमाणु परीक्षण के बाद ख़ुद भी परमाणु परीक्षण किया था लेकिन बाद पेंटागन ने यह कहते हुए प्रतिबंध हटा लिए थे कि "पाकिस्तान ने वज़ीरिस्तान में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ लड़ाई में इच्छाशक्ति का प्रदर्शन किया है." संवाददाताओं का कहना है कि पाकिस्तान ने तो एक बड़े रक्षा पैकेज का अनुरोध किया था लेकिन बाद में सौदे की रक़म यह कहते हुए कुछ कम कर दी गई कि आठ अक्तूबर 2005 को आए भूकंप के बाद वह रक्षा उपकरणों की ख़रीद पर इतनी बड़ी रक़म ख़र्च नहीं कर सकता. पेंटागन का कहना है कि हार्पून मिसाइल में ऐसी उपग्रह चालित प्रणाली का मकरती है जिससे ग़ैरयुद्ध लक्ष्यों पर निशाना लगने का ख़तरा काफ़ी कम होता है. इस तरह इससे पाकिस्तान की नौसैनिक क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी. पेंटागन के अनुसार पाकिस्तान इन नई मिसाइलों को समुद्र में निगरानी रखने वाले जहाज़ों और पनडुब्बियों पर इस्तेमाल करेगा. ग़ौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच 1947 के बाद से तीन बड़े युद्ध हो चुके हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें शाहीन मिसाइल का सफल परीक्षण 29 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस पाक मिसाइलों के नामों पर अफ़ग़ान आपत्ति23 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस हथियार निर्माताओं की प्रदर्शनी31 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 'आकाश' मिसाइल के दो सफल परीक्षण28 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस ब्रहमोस मिसाइल का सफल परीक्षण30 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'भारत हथियारों का सबसे बड़ा ख़रीदार'31 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस पाकिस्तानी क्रूज़ मिसाइल का परीक्षण11 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस मिसाइल परीक्षणों की सूचना दी जाएगी06 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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