| 'भारत हथियारों का सबसे बड़ा ख़रीदार' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार विकासशील देशों में भारत पारंपरिक हथियारों का सबसे बड़ा ख़रीदार है. विकासशील देशों में भारत ने वर्ष 1997 से 2004 में सबसे ज़्यादा पारंपरिक हथियार ख़रीदे और इन देशों के रक्षा सौदों में से दस प्रतिशत भारत के थे. रिपोर्ट के अनुसार भारत ने हथियार ख़रीदने के लगभग साढ़े पंद्रह अरब डॉलर के समझौतों को मंजूरी दी और इस मामले में चीन से भी आगे जा पहुँचा. ये अलग बात है कि वर्ष 2001 से 2004 तक चीन ने अपने रक्षा बजट में भारी वृद्धि की थी लेकिन वर्ष 2004 में भारत अपनी ख़रीदारी में बढ़ोतरी कर फिर चीन से आगे जा पहुँचा. इन हथियारों की ख़रीद में टैंक, पणडुब्बी, लड़ाकू विमान, मिसाइल और गोला-बारूद शामिल हैं. विकासशील व विकसित देशों ने वर्ष 2004 में सबसे अधिक 37 अरब डॉलर के हथियारों के सौदे किए. अमरीका ने पिछले साल में पूरे सौदों में से 33.5 प्रतिशत सौदे किए. अमरीका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ज़ोर देकर कहा, "अमरीका रक्षा समझौते बहुत सख़्त नियमों और क़ानूनों के तहत करता हैं और जिस तरह का संयम हम बरतते हैं हम चाहते हैं कि अन्य देश भी ऐसा ही करें." |
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