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महाराष्ट्र के मंत्री को जेल की सज़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री स्वरूप सिंह नाइक को अदालत के फ़ैसले की अवमानना का दोषी क़रार देते हुए एक महीने जेल की सज़ा सुनाई है. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश वाईके सबरवाल की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंड पीठ ने बुधवार को फ़ैसला सुनाते हुए कहा है कि स्वरूप सिंह नाइक ने जानबूझ कर न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन किया है इसलिए उन्हें ऐसी सज़ा दी जा रही है जो अन्य लोगों के लिए सबक साबित हो. सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में महाराष्ट्र के अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक खोत को भी अदालत की अवमानना का दोषी क़रार देते हुए एक महीने जेल की सज़ा सुनाई है. स्वरूप सिंह नाइक पर आरोप है कि जब वह महाराष्ट्र के वन मंत्री थे तब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के2002 में दिए आदेशों का जानबूझ कर उल्लंघन किया था. सुप्रीम कोर्ट ने वन संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए आदेश दिया था कि आरक्षित वनों के इर्दगिर्द एक किलोमीटर के दायरे में लकड़ी काटने वाली आरा मिलें ना लगाई जाएं और जो हैं उन्हें बिना किसी देरी के बंद किया जाए. मगर अदालत ने पाया है कि इस आदेश के बावजूद महाराष्ट्र में छह आरा मिलें आरक्षित वनों के गिर्द एक किलोमीटर दायरे में काम करती रहीं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अदालत के फ़ैसले को नज़रअंदाज़ करने के लिए स्वरूप सिंह नाइक और तत्कालीन मुख्य वन सचिव अशोक खोत ने सरकारी फ़ाइलों में अपनी तरफ़ से टिप्पणियाँ जोड़ दी थीं. स्वरूप सिंह नाइक और अशोक खोत ने अदालत के फ़ैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है. | इससे जुड़ी ख़बरें आत्महत्या करने को मजबूर विदर्भ के किसान26 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस प्रमोद महाजन का अंतिम संस्कार संपन्न04 मई, 2006 | भारत और पड़ोस प्रमोद महाजन को भाई ने गोली मारी22 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्वास के मुद्दे पर चेताया17 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस महाराष्ट्र में डांस बारों पर लगी पाबंदी हटी12 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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