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माओवादियों को राजा का फ़ैसला नामंज़ूर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में माओवादियों ने संसद बहाली की नेपाल नरेश की घोषणा को ठुकरा दिया है. तीन सप्ताह के विरोध प्रदर्शनों के बाद नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने यह घोषणा की थी. लेकिन सात विपक्षी पार्टियों के गठबंधन ने इस फ़ैसले का स्वागत किया है और नए प्रधानमंत्री के रूप में गिरिजा प्रसाद कोइराला का नाम प्रस्तावित किया है. माओवादी नेताओं का कहना है कि विपक्षी गठबंधन ने लोगों के साथ धोखा किया है. माओवादियों का कहना है कि वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे और संविधान सभा के गठन और गणतंत्र के लिए दबाव बनाए रखेंगे. अपील नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के अध्यक्ष प्रचंड और एक अन्य वरिष्ठ नेता बाबूराम भट्टाराई का कहना है कि राजा का क़दम धोखा और साज़िश है. उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखें. लेकिन मुख्यधारा की विपक्षी पार्टियों ने विरोध प्रदर्शन ख़त्म करने की घोषणा की. माओवादियों ने विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया था लेकिन उन्होंने अपना विरोध प्रदर्शन उस समय तक जारी रखने का फ़ैसला किया है जब तक संविधान सभा के गठन के लिए बिना शर्त चुनाव न हो जाए. हालाँकि विपक्षी गठबंधन का कहना है कि संसद बहाल करने से संविधान सभा के चुनाव की घोषणा और नया संविधान बनाने की दिशा में प्रगति होगी. लेकिन माओवादी संविधान सभा के लिए सीधा चुनाव चाहते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें प्रधानमंत्री पद के लिए कोइराला चुने गए25 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में अमरीकी कर्मचारियों को आदेश24 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस नरेश ने संसद बहाल करने की घोषणा की24 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस राजनीतिक दलों ने एक और रैली बुलाई23 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में अब भी प्रदर्शन जारी22 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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