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सोमवार, 24 अप्रैल, 2006 को 23:42 GMT तक के समाचार
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सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से नाराज़ नेता
मुस्लिम महिला
नज़मा बीबी जैस कई महिलाएं रुढ़िवादी क़ानूनों का शिकार होती हैं
भारत के उड़ीसा राज्य में मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के उस फ़ैसले की समीक्षा के लिए अपील करने का फ़ैसला किया है जिसमें तलाकशुदा मुस्लिम दंपत्ति को एक साथ रहने की अनुमति दी गई है.

राज्य के भद्रक शहर में सन् 2003 में शेर मोहम्मद नामक एक व्यक्ति ने शराब के नशे में अपनी पत्नी को तीन बार तलाक़ कह दिया था लेकिन अगली सुबह उसे अपनी ग़लती का अहसास उन्होंने तय किया कि वो अपनी पत्नी के साथ रहना चाहता है.

लेकिन स्थानीय मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने शेर मोहम्मद के अपनी पत्नी के साथ रहने पर आपत्ति की फतवा जारी कर कहा कि तलाक़ के बाद वो अपनी पत्नी के साथ नहीं रह सकता.

शेर मोहम्मद की पत्नी नजमा बीबी ने इस मामले में कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा कि कोई भी नज़मा बीबी और शेर मोहम्मद को अलग अलग रहने के लिए बाध्य नहीं कर सकता.

अब फतवा देने वाले मुस्लिम धर्मगुरुओं का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फ़ैसला उनकी धार्मिक आज़ादी का उल्लंघन करता है इसलिए वो इसकी समीक्षा के लिए अपील करेंगे.

इन नेताओं ने यह भी कहा है कि इसके लिए भारत के राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को भी पत्र लिखा जाएगा और सुप्रीम कोर्ट में फ़ैसले की समीक्षा के लिए याचिका दायर की जाएगी.

नज़मा बीबी और उनके पति ने सबसे पहले स्थानीय अदालत का सहारा लिया था और वहां भी नज़मा बीबी के हक में फ़ैसला दिया गया लेकिन स्थानीय नेताओं ने दबाव बनाकर नज़मा और उनके पति को साथ रहने नहीं दिया.

इन धर्मगुरुओं का कहना है कि शरीयत के अनुसार अगर नज़मा किसी और व्यक्ति से शादी कर लेती है और उसके बाद अपने दूसरे शौहर को तलाक़ देकर फिर से शेर मोहम्मद से शादी कर सकती है.

नज़मा धर्मगुरुओं की इस सलाह को मानने के लिए कतई तैयार नहीं है.

अब सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद नज़मा बीबी ने चैन की सांस तो ली होगी लेकिन धर्मगुरुओं की नींद बेवजह हराम ज़रुर हो गई है.

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