| इमराना पर भारी दबाव, फ़तवे पर भ्रम | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुज़फ़्फ़रनगर में ससुर के कथित बलात्कार की शिकार इमराना दबाव में हैं. उसके रिश्तेदारों और गाँववालों ने तय किया है कि कोई भी शख्स उससे नहीं मिलेगा. ख़ासकर मीडिया की भूमिका को लेकर गांववाले खासे खफ़ा हैं. इस मामले का दुखद पहलू यह है कि इमराना और उसके पति नूर इलाही को उस अपराध की सज़ा मिल रही है जो उन्होंने नहीं किया है. उल्लेखनीय है कि इमराना ने 13 जून को अपने ससुर अली मोहम्मद के ख़िलाफ़ बलात्कार की एफ़आईआर पुलिस में दर्ज कराई थी. उसके बाद जैसे इमराना पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा. उसे अपनी सुसराल मुज़्ज़फ़रनगर के गाँव चरथावल को छोड़ना पड़ा और अपने मायके में बच्चों के साथ शरण लेनी पड़ी.
इस मामले का दूसरा पेच यह है कि दारुल उलूम के जिस फ़तवे को लेकर इतनी हायतौबा मची हुई है, वह अभी तक इमराना तक नहीं पहुँचा है. पहले ख़बर आई थी कि दारूल उलूम ने एक फ़तवा जारी किया है जिसके मुताबिक़ इमराना और नूर इलाही की शादी ख़त्म हो गई हैं क्योंकि उसके पिता के साथ शारीरिक संबंध हो जाने के कारण वह अपने पति के लिए माँ जैसी हो गई है. दारुल उलूम के प्रवक्ता आदिल सिद्दीकी का कहना है कि ऐसे सवाल मीडिया के लोगों ने पूछे थे. अगर हालात ऐसे हैं कि ससुर ने बलात्कार किया है तो महिला 'हराम' है. उनका कहना था कि इमराना ने कोई आवेदन नहीं किया है. उन्होंने कहा कि बलात्कार हुआ है या नहीं, इसकी जाँच का अधिकार स्थानीय शरीयत अदालत को है. इमराना आजकल मुज़फ़्फ़रनगर के अपने मायके कूकड़ा में रह रही है और वहीं उसका पति नूर इलाही अपने पांच बच्चों के साथ रह रहा है. यह गांव मुज़फ़्फ़रनगर से लगभग 11 किलोमीटर दूर स्थित है और 25 हज़ार आबादी वाले इस गांव में मुसलमानों की आबादी 20 फ़ीसदी है. गांव के प्रधान मुकेश गुप्ता कहते हैं कि गाँव में कोई भी मुस्लिम महिला ग्रेजुएट नहीं है. उन्होंने गाँव प्रधान के रूप में इस बात की पुष्टि की कि अभी तक कोई फ़तवा नहीं मिला है. ‘अस्तित्व’ नामक ग़ैरसरकारी संगठन चलाने वाली रेहाना अदीब इमराना के साथ लगातार संपर्क में हैं. उन्होंने बीबीसी से बातचीत में इस बात की पुष्टि की कि अभी तक कोई फ़तवा इमराना को नहीं मिला है. रेहाना अदीब का कहना था कि यह औरतों से जुड़ा मसला है और इसमें कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए. इमराना ने चुनौती भरा रास्ता अपनाया है और हम जैसी महिलाएँ उसके साथ हैं. नाराज़गी मीडिया से इमराना के परिवारवालों और गाँव के लोगों में ख़ासी नाराज़गी है. जब मैं और मेरे अन्य सहयोगी कूकड़ा गाँव पहुँचे तो हमें गाँववालों की नाराज़गी का सामना करना पड़ा.
इमराना के जीजा नफ़ीस अहमद ने सख्त शब्दों में कहा कि उन्हें माफ़ करें और उन्हें अपने हाल पर छोड़ दें. साथ ही उनका कहना था कि हमारे धार्मिक मामलों में दख़ल न दिया जाए. कई लोग इस मामले को लेकर उत्तेजित थे और उन्होंने बीबीसी टीम को घेर लिया. मुज़्ज़फ़रनगर के पुलिस अधीक्षक (नगर) देवेंद्र कुमार चौधरी ने बीबीसी को बताया कि इस मामले में एफ़आईआर दायर होने के तुरंत बाद हमने इमराना की मेडिकल जाँच कराई और उसके बाद बयान दर्ज़ कर ससुर को गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया. उनका कहना था कि इस मामले में पुलिस की विवेचना अंतिम चरण में है और जल्दी ही पुलिस आरोपपत्र दाखिल कर देगी. पुलिस अधीक्षक का कहना था कि इस मामले में कोई टकराव नहीं है क्योंकि सभी पक्ष ससुर को सज़ा दिलवाना चाहते हैं. मुज़फ़्फ़रनगर की शरीयत अदालत के मुफ़्ती ज़ुल्फिकार ने बताया कि जब तक मामले से जुड़े लोग इस बारे में हस्तक्षेप का अनुरोध नहीं करते हैं तब तक इस मामले पर कोई विचार नहीं किया जाएगा. राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष गिरिजा व्यास ने गुरुवार को मुज़फ़्फ़रनगर में इमराना से मुलाक़ात की थी. इस मुलाक़ात के बाद उन्होंने कहा था कि मीडिया सहित सभी को इस मामले को मानवीय दृष्टि से देखना चाहिए. उन्होंने कहा है कि बलात्कार की शिकार महिला ने अनुरोध किया है कि उन्हें बार-बार चौराहे पर खड़ा नहीं किया जाना चाहिए. |
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