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मुस्लिम पर्सनल क़ानूनों में सुधार की माँग | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एक बार फिर समान नागरिक संहिता जैसे अपने पुराने एजेंडे की ओर लौटती नज़र आ रही है. भाजपा ने एक मुस्लिम महिला के उसके ससुर द्वारा दो सप्ताह पहले कथित बलात्कार प्रकरण को लेकर मुस्लिम पर्सनल क़ानूनों में सुधार की मांग की है. भाजपा के प्रवक्ता अरुण जेटली ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह मामला गंभीर सवाल खड़े करता है. उन्होंने कहा कि महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध अब भी जारी हैं और एक ससुर ने अपनी ही पुत्रवधू के साथ 'बलात्कार' किया है. भाजपा प्रवक्ता ने मांग की कि मुस्लिम पर्सनल क़ानूनों में संशोधन की ज़रूरत है. उन्होंनें कहा कि इस मामले में समाज के सभी तबकों को आगे आना चाहिए. अरुण जेटली ने इस मुद्दे पर काँग्रेस से इस मुद्दे पर अपना रुख़ स्पष्ट करने की माँग की. साथ ही मुस्लिम संगठनों से भी इस मामले में दिए फ़तवे पर सवाल उठाने का अनुरोध किया. मामला ग़ौरतलब है कि एक ग्रामीण पंचायत ने कथित रुप से बलात्कार की शिकार एक महिला के लिए जो निर्णय सुनाया उसके कारण वह जिसकी पत्नी थी उसी की माँ बन गई थी. पीड़ित महिला का आरोप है कि ससुर ने उसके साथ बलात्कार किया था और इसकी सज़ा ससुर को मिलने की जगह उसे मिली और उसे पति से अलग कर दिया गया है. यह मामला उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले के चरथावल क़स्बे का है. 35 वर्षीय महिला का आरोप है कि उसके साथ उसके ससुर ने कथित रुप से तब बलात्कार किया जब उसका पति घर पर नहीं था. बाद में उसने इसके बारे में पति को बताया लेकिन रिक्शा चलाने वाले उस व्यक्ति ने अपने पिता के डर से इस मामले में चुप्पी साधे रखी. पति के इस व्यवहार से क्षुब्ध महिला ने अपने भाई के घर जाकर रहने का फ़ैसला किया. इस घटना की ख़बर अंसारी पंचायत को मिल गई और उसने धार्मिक नियमों और धर्मग्रंथों का हवाला देते हुए फ़ैसला सुनाया कि महिला अब अपने पति के साथ रहने के योग्य नहीं है और उसके पति को उसे तलाक़ देना होगा. |
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