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बुधवार, 15 जून, 2005 को 10:10 GMT तक के समाचार
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पति की ही माँ बना दी गई महिला
मुस्लिम महिलाएँ
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पंचायत के फ़ैसले को ग़लत मानता है
एक सामुदायिक पंचायत ने कथित रुप से बलात्कार की शिकार एक महिला के लिए जो निर्णय सुनाया है उसके चलते वह जिसकी पत्नी थी उसी की माँ बन गई है.

और धार्मिक नेताओं ने इसकी पुष्टि कर दी है.

पीड़ित महिला का आरोप है कि ससुर ने उसके साथ बलात्कार किया था और इसकी सज़ा ससुर को मिलने की जगह उसे मिली और उसे पति से अलग कर दिया गया है.

हालांकि इस मामले की ख़बरें अख़बारों और टेलीविज़न पर आने के बाद प्रशासन सतर्क हुआ है और पुलिस ने ससुर के ख़िलाफ़ बलात्कार का मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरु कर दी है.

मामला

यह मामला मुज़फ़्फ़र नगर के चरथावल क़स्बे का है.

कोई 35 साल की इमराना के साथ उसके ससुर ने कथित रुप से तब बलात्कार किया जब उसका पति इलाही घर पर नहीं था.

बाद में उसने इसके बारे में पति को बताया लेकिन रिक्शा चलाने वाले इलाही ने अपने पिता के डर से इस मामले में चुप्पी साधे रखी.

पति के इस व्यवहार से क्षुब्ध महिला ने अपने भाई के घर जाकर रहने का फ़ैसला किया.

मानों इतनी मुसीबत कम थी इस घटना की ख़बर अंसारी पंचायत को मिल गई, जो एक सामुदायिक पंचायत है.

इस पंचायत ने मामले की सुनवाई करने के बाद धार्मिक नियमों और धर्मग्रंथों का हवाला देते हुए फ़ैसला सुनाया कि वह अब अपने पति के साथ रहने के योग्य नहीं है और उसके पति को उसे तलाक़ देना होगा.

मीडिया में जो ख़बरें आ रही हैं उसके मुताबिक़ पंचायत ने यह भी कहा है कि अब वह इलाही की माँ की तरह हो गई है. यानी रातों रात वह अपने ही पति की माँ हो गई है.

ख़बर यह भी है कि पंचायत ने कहा है कि महिला को 'पाकिज़ियत' यानी पवित्रता हासिल करने के लिए सात महीने दस दिन के लिए अपने पति से अलग रहना होगा.

इस समय तो पाँच बच्चों की माँ अपने भाई के घर पर रह रही है.

जैसा कि पुलिस अधिकारी बता रहे हैं वह अपने पति से भी ख़ासी नाराज़ है.

कार्रवाई

मुज़फ़्फ़र नगर के पुलिस अधीक्षक अमरिंदर सिंह सेंगर ने बीबीसी को बताया कि मीडिया में ख़बरें आने के बाद पुलिस प्रशासन ने महिला के ससुर के ख़िलाफ़ बलात्कार का मामला दर्ज किया है.

 यह सामाजिक-धार्मिक मामला है और मैं इस बारे में अभी कोई टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हूँ
अमरिंदर सिंह सेंगर, एसपी

उन्होंने बताया कि पीड़ित महिला का बयान लिया गया है और उनकी डॉक्टरी जाँच भी करवाई गई है.

पुलिस अधीक्षक के मुताबिक़ ससुर मोहम्मद अली की तलाश की जा रही है.

यह पूछे जाने पर क्या क़ानून के तहत सामुदायिक पंचायत के ख़िलाफ़ भी कोई कार्रवाई हो सकती है, उन्होंने कहा, "यह सामाजिक-धार्मिक मामला है और मैं इस बारे में अभी कोई टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हूँ."

'पंचायत का फ़ैसला ग़लत'

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य ज़फ़रयाब जिलानी का कहना है कि इस मामले में अंसारी पंचायत ने जो फ़ैसला दिया है वह उसके दायरे में नहीं आता.

 शरियत के अनुसार तो महिला के साथ जो कुछ हुआ वह ग़लत है और शरियत के हिसाब से तो उसके ससुर ने यदि बलात्कार किया है उसके लिए उसे मौत की सज़ा दी जानी चाहिए
ज़फ़रयाब जिलानी

उनका कहना है कि यह शरियत से जुड़ा हुआ मामला है और इसका फ़ैसला शरई पंचायत में ही हो सकता है.

शरियत का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बीबीसी को बताया, "शरियत के अनुसार तो महिला के साथ जो कुछ हुआ वह ग़लत है और शरियत के हिसाब से तो उसके ससुर ने यदि बलात्कार किया है उसके लिए उसे मौत की सज़ा दी जानी चाहिए."

उन्होंने कहा कि पंचायत का यह कहना ग़लत है कि महिला अपने पति की माँ हो गईं क्योंकि यदि पति उसे तलाक़ दे दे और उसके बाद महिला अपने ससुर के साथ निकाह करना चाहे तो ही यह हो सकता है.

उन्होंने कहा कि इस मामले में धार्मिक संस्थाओं को दखल देना चाहिए.

हालांकि शरियत के विशेषज्ञ मौलाना जलालुद्दीन उमरी ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा कि शरियत के हिसाब से तो महिला की शादी ख़त्म हो गई और वो अपने पति के साथ नहीं रह सकती.

उन्होंने कहा कि वैसे भी ये रिश्ता इतना संवेदनशील है कि वह उस घर में नहीं रह सकती.

हालांकि उन्होंने कहा कि महिला के ससुर को भारतीय दंड विधान के तहत बलात्कार की सज़ा मिलनी चाहिए.

मुआवज़ा-पुनर्वास

राष्ट्रीय महिला आयोग भी इस घटना की ख़बरें आने के बाद सक्रिय हो गया है.

 आयोग की ओर से उत्तर प्रदेश सरकार से कहा गया है कि धारा 164 के तहत कोर्ट में महिला की गवाही हो और उसको पूरा संरक्षण दिया जाए
गिरिजा व्यास, अध्यक्ष महिला आयोग

महिला आयोग की अध्यक्ष गिरिजा व्यास ने बीबीसी को बताया कि आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार से इस मामले की रिपोर्ट मंगवाई है.

उन्होंने कहा कि यह प्रथमदृष्टया ही बलात्कार का मामला दिखता है और आयोग ने महिला के ससुर के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करने को कहा है.

उन्होंने बताया, "आयोग की ओर से उत्तर प्रदेश सरकार से कहा गया है कि धारा 164 के तहत कोर्ट में महिला की गवाही हो और उसको पूरा संरक्षण दिया जाए."

आयोग ने पीड़ित महिला को पर्याप्त मुआवज़ा देकर उसके पुनर्वास की पूरी व्यवस्था करने का भी अनुरोध किया है.

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