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दुनिया में शरणार्थियों की हालत चिंताजनक | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग ने नई सहस्राब्दी में लोगों के विस्थापन पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जो पिछले पाँच वर्षों में दुनिया भर में शरणार्थियों की स्थिति को सामने लाने की एक कोशिश है. रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में शरणार्थियों की संख्या में तो कमी आई है मगर जो लोग अपने ही देश में अपना घर छोड़कर किसी दूसरी जगह पर जाने के लिए मजबूर हो रहे हैं उनकी स्थिति चिंताजनक हो रही है. इस बीच इस रिपोर्ट का यही पहलू श्रीलंका में दिख रहा है जहाँ पूर्वी क्षेत्र त्रिंकोमाली से लोग हिंसा के कारण घर छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं. नार्वे शरणार्थी परिषद की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि समय के साथ संघर्ष का प्रारूप भी बदल गया है जिसकी वजह से शरणार्थियों की संख्या में कमी आई है. शीत युद्ध के ख़त्म होने के बाद देश की सीमाओं पर लड़ाई कम हो गई है, इसीलिए एक देश से दूसरे देश में शरण लेने वाले लोगों की संख्या भी कम हो गई है. संयुक्त राष्ट्र में शरणार्थी मामलों के उच्चायुक्त ऐंतोनियों गुतारीस ने इसका स्वागत किया है, "शीत युद्द के बाद कई जगहों पर शुरू हुए संघर्षों के ख़त्म होने की वजह से अब लोग अपने घरों को लौट रहे हैं. मैं कहूंगा कि ये हमारे काम का सबसे अच्छा और सबसे खुशी देने वाला पहलू है – लोगों की अपने घर लौटने में मदद करना). लेकिन रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है बदलते परिवेश में देशों के अंदर आपसी संघर्ष बढ़ने के कारण विस्थापितों की संख्या में इज़ाफ़ा हो गया है. अब अपने ही देश में विस्थापित लोगों की संख्या अंतरराष्ट्रीय शरणार्थियों के मुक़ाबले दोगुनी हो गई है. चूँकि आपसी संघर्ष से प्रभावित लोगों को विदेशों में शरण मिलने में परेशानी होती है, इसलिए वो अपने ही देश में शरणार्थी बन कर रहने के लिए मजबूर हैं. इसके लिए ऐसे देशों की सरकारों को ज़िम्मेदार ठहराया गया है. सर्वेक्षण के अनुसार कई देशों में राष्ट्रीय सेनाएँ और सुरक्षाबल लोगों को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर कर रहे हैं. मिसाल के लिए सूडान में सबसे ज़्यादा 50 लाख विस्थापित हैं और वहाँ की अरब बहुल सरकार पर स्थानीय अफ्रीकियों पर हमले करने का आरोप है. दूसरे सबसे ज़्यादा विस्थापित कोलंबिया में हैं, जहाँ लोग नशीले पदार्थों की तस्करी के रास्तों पर सरकार के क़रीबी माने जाने वाले दक्षिणपंथी सुरक्षाबलों और वामपंथी लड़ाकों के बीच संघर्ष के कारण बहुत से लोगों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पडा है. नेपाल में भी राजशाही और माओवादियों के बीच चल रहा संघर्ष अनेक लोगों के विस्थापित होने का कारण बना है. उधर श्रीलंका में जारी हिंसा के कारण इसी सप्ताह त्रिंकोमाली में सैकड़ों लोग इलाक़े से भाग गए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें सैकड़ों लोग त्रिंकोमाली छोड़कर भागे19 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस घर लौटने की आस में लाखों शरणार्थी17 अगस्त, 2005 | पहला पन्ना उज़बेकिस्तान स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय चिंता20 मई, 2005 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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