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कर्मचारियों की मांगें नहीं मानेगी सरकार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पेंशन संबंधी लाभ को लेकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारियों की देशव्यापी हड़ताल आज लगातार दूसरे दिन भी जारी रही लेकिन सरकार ने साफ कर दिया कि ये मांगे मानी नहीं जा सकती. स्टेट बैंक कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल कर रखी है जिसके कारण देश भर में बैंकिंग सेवाओं पर बुरा असर पड़ रहा है. संवाद समिति प्रेट्र के अनुसार दिल्ल में वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि स्टेट बैंक कर्मचारियों की ये मांगे नहीं मानी जा सकती क्योंकि अगर ऐसा किया गया तो हर बैंक ऐसी ही मांग करने लगेगा. हालांकि उन्होंने मांगा कि इस हड़ताल से वित्तीय व्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है और लोगों को दिक्कत हो रही है. दोनों पक्षों के बीच कल भी बातचीत होनी है. उधर ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के महसचिव शांता राजू ने कहा है कि जब तक मांगे मानी नहीं जाती तब तक हड़ताल जारी रहेगी. देश भर में स्टेट बैंक की नौ हज़ार से अधिक शाखाओं में दो लाख से अधिक लोग काम करते हैं. उनकी मांग है कि पेशन लाभों को बढ़े हुए वेतन के आधार पर बढ़ाया जाए. श्रम संगठनों ने दिल्ली में एक अप्रैल को श्रम आयुक्त से वार्ता की थी लेकिन इसका कोई परिणाम नहीं निकला था जिसके बाद हड़ताल का आह्वान किया गया था. बैंक कर्मचारियों की मांग है कि पेंशन संबंधी लाभों को अभी भी 1992 के वेतन के आधार पर रखा गया है जबकि 1997 और 2002 में वेतनमान बढ़ाया गया है. उनका कहना है कि पेंशन लाभ भी बढ़े हुए वेतनमान के आधार पर दिया जाना चाहिए. | इससे जुड़ी ख़बरें देशव्यापी हड़ताल से जनजीवन प्रभावित29 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस हवाईअड्डा निजीकरण को मंज़ूरी01 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस ऊँट पर चलता 'मोबाइल बैंक'05 फ़रवरी, 2004 | भारत और पड़ोस बुनियादी सुविधाओं पर ज़ोर | भारत और पड़ोस ब्रिटेन में खुलेगा इस्लामी बैंक09 अगस्त, 2004 | भारत और पड़ोस छत्तीसगढ़ः पाँच करोड़ की बैंक डकैती14 सितंबर, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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