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गुरुवार, 29 सितंबर, 2005 को 21:46 GMT तक के समाचार
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देशव्यापी हड़ताल से जनजीवन प्रभावित
हड़ताल
बैंक और बीमा क्षेत्र में कामकाज प्रभावित हुआ है
भारत में यूपीए सरकार की आर्थिक नीतियों और निजीकरण के विरोध में वामपंथी मज़दूर संगठनों की एक दिन की देशव्यापी हड़ताल से बैंकों, बीमा कंपनियों, उद्योग जगत में कामकाज के साथ-साथ रेल और वायुसेवाएँ प्रभावित हुई हैं.

गुरूवार को हुई इस हड़ताल में सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के लाखों कर्मचारी शामिल हुए.

वामपंथी मज़दूर संगठनों की हड़ताल तो जारी है लेकिन विमानतलों का निजीकरण किए जाने का विरोध कर रहे विमानतल कर्मचारियों की हड़ताल ख़त्म हो गई है.

विमानतलों पर कई उड़ानें रद्द किए जाने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. हालाँकि मुंबई से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि विमानतल पर हड़ताल का ज़्यादा असर नहीं हुआ.

हालाँकि सरकार की ओर से कहा गया था कि कामकाज ठीक तरह से चलाने के लिए विमानतलों पर वायुसेना के कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा लेकिन इससे कामकाज की बाधा दूर नहीं की जा सकी.

मज़दूर संगठन केंद्र की यूपीए सरकार की आर्थिक नीतियों, लाभ देने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों का निजीकरण, श्रम क़ानून को लचीला बनाए जाने और विमानतलों के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं.

उल्लेखनीय है कि सरकार को समर्थन कर रही वामपंथी पार्टियाँ भी समय समय पर इन नीतियों का विरोध करती रही हैं.

हड़ताल

2004 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए की सरकार बनने के बाद मज़दूर संगठनों की यह पहली बड़ी हड़ताल है.

इस हड़ताल से पश्चिम बंगाल और केरल में सबसे ज़्यादा असर हुआ है.

 यह सरकार को एक चेतावनी है. अगर सरकार अपनी आर्थिक नीतियों की व्यापक समीक्षा नहीं करती तो हम इससे भी बड़ा क़दम उठाएंगे
एमके पंधे, मज़दूर नेता

हड़ताल की वजह से पूर्वी और दक्षिण पूर्वी रेल की कई रेलगाड़ियों को जगह-जगह रोका गया.

पश्चिम बंगाल में जहाँ वामदलों की सरकार है, इस हड़ताल का सबसे ज़्यादा असर हुआ है.

समाचार एजेंसियों के अनुसार कोलकाता की सड़कों पर भी हड़ताल का असर साफ़ दिखाई दे रहा है.

इसके अलावा केरल में, जहाँ वामदलों का अच्छा प्रभाव है हड़ताल का असर दिया.

हड़ताल
हड़ताल को मज़दूर संगठनों ने एक चेतावनी बताया है

सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) के महासचिव एमके पंधे ने कहा है, "यह सरकार को एक चेतावनी है. अगर सरकार अपनी आर्थिक नीतियों की व्यापक समीक्षा नहीं करती तो हम इससे भी बड़ा क़दम उठाएंगे."

मुंबई में ऑल इंडिया बैंक एम्लाइज़ एसोसिएशन के संयुक्त सचिव, विश्वास उतागी ने बीबीसी से कहा, "सरकार को कर्मचारी संगठनों से बात करनी चाहिए ताकि इस समस्या का हल निकाला जा सके."

उन्होंने कहा कि सरकार को निजी क्षेत्रों के बैंकों और सरकारी बैंकों के कामकाज की तुलना करनी चाहिए. यक़ीनन सरकारी बैंक ज़्यादा सफलता से काम कर रहे हैं.

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