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खेतिहर मज़दूरों ने भी मुफ़्त बिजली माँगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पंजाब के खेतिहर मज़दूरों ने राजधानी चंडीगढ़ में एक रैली की है और पंजाब सरकार पर उनके साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि जहाँ पंजाब में किसानों को मुफ़्त बिजली दी जा रही है, वहीं जमीन पर खेती करने वाले मज़दूरों को बिजली के लिए पैसे देने पड़ते हैं. महत्वपूर्ण है कि पंजाब में कांग्रेस सरकार ने सितंबर 2005 में कृषि क्षेत्र के लिए मुफ़्त बिजली देने की घोषणा की थी. इससे पहले वर्ष 2002 तक पंजाब में अकाली-भाजपा सरकार कृषि क्षेत्र को मुफ़्त बिजली देती थी लेकिन वर्ष 2002 में हुए चुनावों के बाद ये सुविधा बंद कर दी गई थी. अनेक पर्यवेक्षक मानते हैं कि ये सुविधाएँ पंजाब में चुनावों को ध्यान में रखते हुए दी जाती हैं. अब खेतिहर मज़दूर चाहते हैं कि उनसे भी किए गए ऐसे ही वादे पूरे किए जाएँ. लेकिन प्रदर्शनकारियों के प्रवक्ता तरसेम पीटर का कहना था कि सरकार की हर ग़रीब घर को 200 यूनिट मुफ़्त बिजली देने की पेशकश अपर्याप्त है. खेतिहर मज़दूरों, दलितों और ग़रीब ईसाइयों का प्रतिनिधित्व कर रहे पीटर का कहना था कि ये वर्ग अगले साल होने वाले चुनावों में कांग्रेस का विरोध करेंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें 'मुफ़्त बिजली की नीति समाप्त हो'28 मई, 2005 | भारत और पड़ोस हरियाणा ने करोड़ों के बिल माफ़ किए17 जून, 2005 | भारत और पड़ोस मुफ़्त बिजली के ख़िलाफ़ याचिका ख़ारिज 28 नवंबर, 2003 | भारत और पड़ोस बिजली और सड़क के लिए नए वादे14 नवंबर, 2003 | भारत और पड़ोस कितना गंभीर है भारत का बिजली संकट?22 मई, 2003 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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