|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुफ़्त बिजली के ख़िलाफ़ याचिका ख़ारिज
मध्य प्रदेश के जबलपुर हाईकोर्ट के एक फ़ैसले ने आज दिग्विजय सिंह सरकार को ग़रीबों और किसानों को मुफ़्त बिजली से जुड़े मामले राहत दे दी है. हाईकोर्ट ने अपने एक फ़ैसले में उस जनहित याचिका को ख़ारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि दिग्विजय सिंह सरकार चुनाव आयोग के फ़ैसले को लागू नहीं कर रही है. उल्लेखनीय है कि चुनाव के ठीक पहले, सितंबर के आख़िरी सप्ताह में मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने घोषणा की थी कि ग़रीब किसानों को पाँच हॉर्सपॉवर तक के पंप के लिए बिजली का बिल माफ़ कर दिया जाएगा और इसी तरह एक बत्ती कनेक्शन के लिए बिल नहीं लिया जाएगा. लेकिन उनकी इस घोषणा को चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त जेएम लिंगदोह ने रोक लगा दी थी. बाद में जबलपुर हाईकोर्ट में एक और जनहित याचिका दायर की गई जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयोग के आदेशों का सरकार पालन नहीं कर रही है. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सरकार ने जिन लाखों लोगों को एक बत्ती कनेक्शन दे दिया है और जिन किसानों को पंप कनेक्शन दे दिया है उनसे बिजली का बिल नहीं वसूल रही है. सरकार की ओर से पूर्व महाधिवक्ता विवेक तनखा ने कहा कि आयोग के आदेश के बाद से कोई भी नया कनेक्शन नहीं दिया गया है. उनका कहना था कि जहाँ तक बिजली के बिल का सवाल है तो यह तकनीकी कारणों से संभव नहीं है कि इतनी जल्दी बिल बना लिए जाएँ. शुक्रवार को हाईकोर्ट ने कहा कि चूंकि सरकार ने चुनाव आयोग के आदेशों के बाद से कनेक्शन नहीं दे रही है इसलिए यह आदेशों का उल्लंघन नहीं है. हाईकोर्ट ने इस याचिका को ख़ारिज कर दिया. याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट ने सलाह दी है कि यदि उन्हें और कोई शिकायत हो तो वे सीधे चुनाव आयोग से इसकी शिकायत करें. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस फ़ैसले ने दिग्विजय सिंह सरकार को राहत दे दी है क्योंकि सरकार बिजली के बिल भी नहीं दे रही है और तकनीकी आधार पर इससे बरी भी हो गई है. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||