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दिग्विजय को चुनाव आयोग का झटका
भारत के चुनाव आयोग ने मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के पहले मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को तगड़ा झटका दिया है. सोमवार को चुनाव आयोग ने ग़रीब किसानों के लिए बिजली बिल माफ़ करने की राज्य सरकार की घोषणा को रद्द करने का निर्देश दिया. मध्य प्रदेश सरकार ने सितंबर के आख़िरी सप्ताह में पिछले तीन साल के दौरान एक बत्ती कनेक्शन और किसानों के लिए पाँच हॉर्स पॉवर पंपों के बिल माफ़ करने की घोषणा की थी. मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपनी इस घोषणा का वित्तीय भार दिसंबर में चुनकर आने वाली नई सरकार पर छोड़ दिया था. लेकिन राज्य सरकार के इस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका 27 सितंबर को जबलपुर हाई कोर्ट में दाख़िल की गई थी. हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग से अपील की थी कि वह इस मामले में अपना निर्णय बताए. अब मुख्य चुनाव आयुक्त जेएम लिंगदोह ने माना है कि राज्य सरकार की घोषणा चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है. हालाँकि छह अक्तूबर को चुनाव आयोग ने राज्य विधानसभा चुनाव की घोषणा की थी और आदर्श आचार संहिता उस दिन से लागू मानी जाएगी. लेकिन चुनाव आयोग का कहना है कि इस घोषणा से आचार संहिता का उल्लंघन इसलिए होता है क्योंकि इस योजना को पाँच नवंबर से लागू होना था. चुनाव आयोग ने राज्य सरकार के साथ-साथ मध्य प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड को भी इस योजना पर अमल रोकने का निर्देश दिया है. मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और राज्य बिजली बोर्ड से यह भी कहा गया है कि अगर इस आदेश का उल्लंघन हुआ तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी. चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि अगर राज्य सरकार चाहती तो चुनाव के एक महीने बाद भी इस योजना को लागू कर सकती थी. राज्य में मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव आयोग के इस फ़ैसले पर ख़ुशी ज़ाहिर की है. भाजपा ने दिग्विजय सरकार की इस घोषणा को एक चुनावी स्टंट बताया था. |
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