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मध्यप्रदेश में सिर्फ़ विकास ही है मुद्दा
राज्य के विकास और जनता की परेशानियाँ जिस तरह मध्यप्रदेश में चुनावी मुद्दा बनी हैं उस तरह भारत में कम ही होता है. राज्य में बिजली की कमी, खस्ता हाल सड़कें और पानी की किल्लत ही मुख्य चुनावी मुद्दा हैं. और ये मुद्दे कुछ इस तरह से उभरे हैं कि साल भर पहले दलितों पर दस्तावेज़ जारी करने वाले दिग्विजय सिंह इस समय दलितों की बात भी नहीं कर पा रहे हैं. आमतौर पर विधानसभा चुनाव में जो स्थानीय मुद्दे उभरते हैं इस बार वे भी हाशिए पर ही दिखते हैं. यह सच है कि तीन साल पहले छत्तीसगढ़ के अलग हो जाने के बाद से मध्यप्रदेश में एकाएक बिजली का संकट पैदा हो गया क्योंकि बिजली बनाने वाली इकाइयाँ छत्तीसगढ़ के खाते में चली गईं. इस बीच राज्य में सड़कों की हालत लगातार ख़राब होती गई और सूखा आदि के चलते पानी की भी भारी किल्लत का सामना करना पड़ा. तीसरी पारी दिग्विजय सिंह पहली बार 1993 में मुख्यमंत्री बने थे और 1998 में दूसरी बार अब वे तीसरी पारी जीतने की कोशिश कर रहे हैं. जब 1998 में चुनाव हो रहे थे तब प्रदेश और यहां तक कि देश के सारे अख़बारों और टेलीविज़न चैनल ने चुनाव सर्वेक्षणों के आधार पर एक तरह से यह घोषणा ही कर दी थी कि दिग्विजय सिंह चुनाव हार रहे हैं. लेकिन वे नहीं हारे. इस बार उनका वह जुमला परीक्षा की कसौटी पर है कि चुनाव काम से नहीं जीते जाते. चुनाव के मुद्दे बता रहे हैं कि उनके पिछले कार्यकाल में काम का होना न होना ही बड़ा सवाल है. हालांकि अब कांग्रेस यह वादा कर रही है कि यदि उन्हें मौक़ा मिला तो वे अगले कार्यकाल में 2007 तक बिजली का संकट दूर कर देंगे और सड़कें दुरुस्त कर देंगे. भाजपा की रणनीति दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने पिछले चुनावों में जीत से पहले पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री बनने की होड़ का खामियाजा भुगतने के बाद इस बार रणनीति बदल ली है. अब बाक़ायदा उमा भारती को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया है और पार्टी की बागडोर उनके हाथों में सौंप दी है. तेज़ तर्रार नेता उमा भारती ने अपनी टीम में अपेक्षाकृत युवा लोगों को ही ज़्यादा रखा हुआ है और यह दावा कर रही हैं कि अब पार्टी के भीतर पहले जैसी गुटबाज़ी नहीं है. भारतीय जनता पार्टी का भी वादा है कि 2007 तक वे राज्य में 3000 मेगावाट बिजली पैदा करके आत्मनिर्भर बना देंगे. सड़कें बनाने का भी वादा है. इसके अलावा भाजपा उन 28,000 दैनिक वेतनभोगियों को भी वापस नौकरी पर लेने का आश्वासन दे रही है जिनको दिग्विजय सिंह ने ख़र्च कम करने के लिए नौकरी से हटा दिया था. राज्य में भ्रष्टाचार को भी भाजपा बड़ा मुद्दा बना रही है.
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