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'मुफ़्त बिजली की नीति समाप्त हो' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मुफ़्त में बिजली देने की नीति को समाप्त करने को कहा है. मनमोहन सिंह ने हिमाचल प्रदेश में झाकड़ी में भारत की सबसे बड़ी पनबिजली योजना के उदघाटन पर ये बात कही. नाथपा झाकड़ी पनबिजली योजना से 1500 मेगावाट बिजली का उद्पादन होगा और यह एशिया का सबसे बड़ी पनबिजली योजना है. प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समय है कि लोगों को यह बताने का कि मुफ़्त बिजली विद्युत उद्योग के लिए ठीक नहीं है. उनका कहना था कि बिजली की मांग बढ़ लगातार बढ़ रही है और इसकी कमी के कारण वितरण में कटौती करनी पड़ती है. प्रधानमंत्री का कहना था कि इस परियोजना से उत्तरी ग्रिड पर दबाव कम होगा. यह परियोजना हिमाचल की राजधानी शिमला से 150 किलोमीटर दूर सुतलज नदी पर स्थित है. बिजली की कमी एक अनुमान के अनुसार बिजली संयत्रों से लोगों या उद्योगों तक बिजली पहुँचने तक एक बड़ा हिस्सा चोरी या बर्बाद हो जाता है.
बिजली के सभी बिल अदा नहीं किए जाते और बिजली उत्पादन का कुल 41 प्रतिशत ही बिजली बोर्डों के लिए पैसा कमाता है. विशेषज्ञों का मत है कि यदि भारतीय अर्थव्यवस्था को सात प्रतिशत की दर से बढ़ना है तो बिजली के उत्पादन में हर साल दस प्रतिशत की वृद्धि होनी चाहिए. गर्मियों के मौसम में माँग और आपूर्ति के बीच भारी अंतर बढ़ जाता है. ऊर्जा क्षेत्र के अनुमान के अनुसार भारत में बिजली के दाम भी बहुत कम हैं. |
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