|
मनोहर श्याम जोशी का निधन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हिंदी के सुप्रसिद्ध लेखक और पत्रकार मनोहर श्याम जोशी का गुरुवार को दिल्ली में निधन हो गया. वे 73 वर्ष के थे. मनोहर श्याम जोशी भारत में टीवी धारावाहिकों के जनक माने जाते हैं. वो पिछले कुछ दिनों से बीमार थे और अस्पताल में भर्ती थे. गुरुवार की सुबह उनका ह्दय गति रुक जाने से निधन हो गया. उनका जन्म 9 अगस्त, 1933 को अल्मोड़ा ज़िले में हुआ था. उन्होंने 'हम लोग' और 'बुनियाद' से भारत के टेलीविज़न की दुनिया में एक नई शुरुआत की थी. 1982 में शुरू हुए हम लोग की लोकप्रियता का आलम यह था कि जब यह सीरियल शुरू होता था तो सड़कें सूनी हो जाती थीं.
वे तीखे व्यंग्य के लिए भी जाने जाते हैं और उन्होंने 'कक्का जी कहिन' और 'मुंगेरी लाल के हसीन सपने' जैसे धारावाहिक लिखे. साथ ही उन्होंने उत्कृष्ट साहित्य रचनाएँ भी लिखीं. उनके कुरु कुरु स्वाहा और कसप जैसे उपन्यास चर्चित हुए. उन्होंने पत्रकारिता में नए आयाम स्थापित किए थे. उन्होंने साप्ताहिक हिंदुस्तान और वीकेंड रिव्यू का संपादन किया और विज्ञान से लेकर राजनीति तक सभी विषयों पर लिखा. मनोहर श्याम जोशी को 2005 में साहित्य अकादमी का प्रतिष्ठित पुरस्कार दिया गया था. वरिष्ठ साहित्यकार कमलेश्वर का कहना था, '' मनोहर श्याम जोशी का चला जाना हिंदी के लिए एक हादसा है. उनका व्यक्तित्व बहुआयामी था और वे विलक्षण प्रतिभा के धनी थे.'' ख़त्म होता व्यंग्य
कुछ अर्सा पहले उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा था कि समाज में व्यंग्य की जगह ख़त्म हो गई है क्योंकि वास्तविकता व्यंग्य से बड़ी हो गई है. उनका कहना था कि व्यंग्य उस समाज के लिए है जहाँ लोग छोटे मुद्दों को लेकर भी संवेदनशील होते हैं. मनोहर श्याम जोशी का मानना था, ''हम निर्लज्ज समाज में रहते हैं, यहाँ व्यंग्य से क्या फ़र्क पड़ेगा.'' टीवी सीरियलों की दशा से भी वो खुश नहीं थे. उनका कहना था कि टीवी तो फ़ैक्टरी हो गया है और लेखक से ऐसे परिवार की कहानी लिखवाई जाती है जिसमें हीरोइन सिंदूर लगाकर पैर भी छू लेती है और फिर स्विम सूट भी पहन लेती है. |
इससे जुड़ी ख़बरें 'हम एक निर्लज्ज समाज में रहते हैं'13 अक्तूबर, 2003 को | मनोरंजन साहित्यकार निर्मल वर्मा का निधन26 अक्तूबर, 2005 | मनोरंजन 'मैंने अमृता को जी लिया, अमृता ने मुझे'01 नवंबर, 2005 | मनोरंजन साहित्यकार अमृता प्रीतम नहीं रहीं31 अक्तूबर, 2005 | मनोरंजन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||