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'यह हिंदी जगत के लिए एक हादसा है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं मनोहर श्याम जोशी के निधन पर किस तरह प्रतिक्रिया व्यक्त करूँ. मुझे लगता है कि मीडिया, साहित्य और पत्रकारिता का एक बड़ा व्यक्ति गुज़र गया. हम लोग इस ख़बर से सदमे में हैं और उनके निधन से निरंतर दुखी हैं. मेरा मानना है कि यह साहित्य, मीडिया और पत्रकारिता के लिए एक हादसा है. यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि वे टेलीविज़न क्षेत्र के पितामह थे. उन्होंने हम लोग, बुनियाद, कक्काजी कहिन और मुंगेरीलाल के हसीन सपने जैसे सीरियल दिए. उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में भी कीर्तमान स्थापित किए. मेरा मानना है कि मनोहर श्याम जोशी मीडिया के महापुरुष, पत्रकारिता के लौहपुरुष और साहित्य के शलाका पुरुष थे. वे विलक्षण प्रतिभा के धनी थे और साथ ही उनकी रचनात्मकता में कहीं कोई कमी नहीं थी. उन्हें बहुआयामी व्यक्तित्व वाली शख्सियत के रूप में जाना जाएगा. सुप्रसिद्ध लेखक और पत्रकार मनोहर श्याम जोशी का गुरुवार को दिल्ली में ह्दय गति रुकने से निधन हो गया था. (आशुतोष चतुर्वेदी से बातचीत पर आधारित) |
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