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'किसानों की दशा सुधारनी होगी'
वेन जियाबाओ
चीन के प्रधानमंत्री ने विकास में सबको शामिल करने की बात कही है
चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने चीनी संसद के सत्र की समाप्ति के मौके पर किसानों की दशा सुधारने की बात कही है.

सत्र की शुरूआत और अंत दोनों में ही प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने सरकार की प्राथमिकताओं को बहुत सावधानी से रेखांकित किया.

उन्होंने कहा कि पिछले दशकों में चीन में जिस तेज़ी से विकास हुआ है उसमें सबको शामिल करने की ज़रूरत है.

चीनी प्रधानमंत्री ने मुफ़्त शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतरी और गाँवो की मूलभूत सुविधाओं पर और ज़ोर देने का वादा किया.

साथ ही उन्होंने कहा कि ग़ैरक़ानूनी ढ़ंग से किसानों की ज़मीन पर होनेवाले क़ब्ज़े पर वो रोक लगाएंगे क्योंकि गाँवों में बढ़ रहे विरोध प्रदर्शनों और अशांति का ये प्रमुख कारण है.

लेकिन प्रधानमंत्री ने सीधे शब्दों में किसानों को मालिक़ाना हक़ देने की कोई बात नहीं की.

बीबीसी संवाददाता जिल मैक्गिवरिंग का कहना है कि चीन के शासकों में देश के किसानों में बढ़ते ग़ुस्से के प्रति कुछ चिंता पैदा होती नज़र आई है.

असंतोष

बीबीसी संवाददाता जिल मैक्गिवरिंग के मुताबिक चीनी प्रधानमंत्री के संदेश का ये मतलब नहीं है कि चीन आर्थिक सुधारों से मुँह फेर रहा है, बल्कि ये एक सीधी कोशिश थी चीन में हो रहे बदलावों के प्रति गाँवों में बढ़ते असंतोष पर लगाम डालने की.

जबसे चीन खुले बाज़ार की नीति पर चला है, शहरों और गाँवों, अमीरों और ग़रीबों के बीच खाई बढ़ती चली जा रही है.

पिछले सालों में कई बार किसान सड़कों पर उतरे हैं और पुलिस से भिड़ चुके हैं.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि किसानों की ज़मीन पर विकास के नाम पर क़ब्ज़ा किया जाता है.

लोगो की आमदनी के बीच बढ़ती खाई और गाँवों में पनप रहे असंतोष को चीन देश की स्थिरता के लिए सबसे बड़ा ख़तरा मानता है.

चीन में अब कोशिश ये है कि अंधाधुँध विकास की जगह संगठित और ठोस विकास की ओर बढ़ा जाए.

जिल मैक्गिवरिंग के मुताबिक ये बहस का मुद्दा है कि इन छोटी छोटी रेवड़ियों से चीन की ग्रामीण जनता का कितना भला होगा क्योंकि सरकारी खर्च में इसका हिस्सा बेहद छोटा है.

जिल मैक्गिविरंग का कहना है कि गाँवों में बढ़ती बेरोज़गारी पर रोक लगाने के लिए भी ये एक बहुत ही बौना कदम है.

चीन में पहले के मुकाबले एक जगह से दूसरे जगह जाने की अब ज़्यादा छूट है लेकिन अभी भी कई पुराने नियम इस डर से बरकरार हैं कि कहीं शहरों पर जनसंख्या का दबाव न बढ़ जाए.

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