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सरबजीत मामले में अपील नामंज़ूर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने वहाँ बंद भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह की मौत की सज़ा पर पुनर्विचार करने के लिए दायर चार में से एक याचिका ख़ारिज़ कर दी है. पाकिस्तान में इस व्यक्ति को मनजीत सिंह बताया जा रहा है. उसपर जासूसी और 1990 में कई बम धमाके करवाने का आरोप है जिसमें 14 लोग मारे गए थे. मगर सरबजीत के परिवारवालों का कहना है कि वे एक निर्दोष किसान हैं और उनको भूल से कोई और समझकर पकड़ लिया गया है. उनके वकील राना अब्दुल हमीद ने मौत की सज़ा पर पुनर्विचार के लिए चार अपीलें दायर की थीं जिनमें से तीन पर सुनवाई होनी बाक़ी है. उन्होंने बताया कि गुरूवार को सुप्रीम कोर्ट के दो सदस्यों के पीठ ने ये कहते हुए अपील नामंज़ूर कर दी कि ये अपील सज़ा सुनाए जाने के 60 दिन के बाद दायर की गई जो निर्धारित समय के बाद था. सरबजीत सिंह को 1990 में लाहौर और फ़ैसलाबाद में हुए चार बम धमाकों के सिलसिले में गिरफ़्तार किया गया था. उनपर लाहौर की एक अदालत में मुक़दमा चला और 1991 में उनको मौत की सज़ा सुना दी गई. निचली अदालत की ये सज़ा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी बहाल रखी. पिछले साल सिंह के वकील ने मौत की सज़ा को रोके जाने के लिए चार पुनर्विचार याचिकाएँ दायर की थीं. इस्लामाबाद से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अगर चारों याचिकाएँ रद्द कर दी जाती हैं तो केवल राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के पास ही क्षमा करने का अधिकार रहेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें सरबजीत मामले की समीक्षा की अपील29 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस सरबजीत की सज़ा बरक़रार27 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस सरबजीत के मामले का गवाह मुकर गया05 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस भारतीय अधिकारी सरबजीत सिंह से मिले30 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस सरबजीत की रिहाई के लिए ज्ञापन 27 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस सरबजीत से मिलने की इजाज़त26 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस 'फाँसी के मामले में मनमोहन बात करेंगे'23 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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