|
'प्रवेश परीक्षाएँ बंद नहीं हो सकती' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तमिलनाडु में राज्य सरकार की इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षाओं को बंद करने की योजना को धक्का लगा है. तमिलनाडु उच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि राज्य सरकार के पास प्रवेश परीक्षाएँ बंद करने का अधिकार ही नहीं है और ये अधिकार केंद्र सरकार का है. न्यायालय ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह इस साल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट यानि प्रवेश परीक्षा करवाने का इंतज़ाम करे. राज्य सरकार ने पिछले साल ही ये कहते हुए ये प्रवेश परीक्षा बंद करने का फ़ैसला किया था कि इसमें ग्रमीण छात्रों के साथ भेदभाव होता है. लेकिन पिछले साल भी न्यायालय ने सरकार को कम से कम उस साल परीक्षा करवाने के लिए कहा था. जानकारों के अनुसार सरकार ये चाहती है कि प्रवेश परीक्षा की जगह 12वीं कक्षा में पाए गए अंकों के आधार पर ही दाखिला हो. सरकार के साथ-साथ कई विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी छात्र तो प्रशिक्षण संस्थानों के ज़रिए प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर पाते हैं लेकिन ग्रमीण छात्र ऐसा नहीं कर सकते इसलिए प्रवेश परीक्षा में उनके साथ भेदभाव हो जाता है. | इससे जुड़ी ख़बरें दसवीं में अब कोई फेल नहीं होगा22 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस परीक्षा-प्रणाली में बदलाव के लिए सुझाव05 जून, 2005 | भारत और पड़ोस आईआईएम प्रवेश परीक्षा टली 24 नवंबर, 2003 | भारत और पड़ोस 'विषयों के चयन का कोई फ़ॉर्मूला नहीं'20 जून, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||