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एक उदाहरण बन गई हैं गिरिजा देवी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पिछड़े बिहार में मुसहर सबसे पिछड़ी जातियों में से एक है लेकिन गिरिजा देवी इस समुदाय के लिए एक शानदार उदाहरण बन गई हैं. गिरिजा देवी अपने समुदाय की पहली महिला बन गई हैं जो संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन को संबोधित करेंगी. उन्हें उनके शराबबंदी आंदोलन के लिए और फिर अपने समुदाय के उत्थान के लिए किए गए कार्यों के लिए जाना जाता है. जिस मुसहर समुदाय की गिरिजा देवी हैं वो मूस यानी चूहे खाने वाला समुदाय माना जाता है. वे इतनी ग़रीबी में रहते हैं कि अक्सर उनका मुख्य भोजन चूहा ही होता है. गिरिजा देवी भारत की पाँच महिलाओं का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और वे संयुक्त राष्ट्र में 27 फ़रवरी को महिलाओं की स्थिति पर बोलेंगी. वे अपना भाषण भोजपुरी में देंगी. समस्याएँ अछूत माने जाने वाले मुसहर समुदाय के लोगों के सामने समस्याओँ का अंतहीन अंबार है.
बिहार में मुसहरों की जनसंख्या 13 लाख है. इनमें से एक प्रतिशत से भी कम लोग साक्षर हैं और 98 प्रतिशत लोग भूमिहीन हैं. मुसहर आम तौर पर दूसरों के खेतों पर काम करते हैं और साल में आठ महीने उनके पास कोई काम नहीं होता. इस समुदाय के पुरुष शराब की लत से पीड़ित हैं और अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा देसी शराब में उड़ा देते हैं और यह इस समुदाय की सबसे बड़ी समस्या बन गई थी. पूर्वी चंपारण ज़िले के भिरकिया छपौलिया गाँव में गिरिजा देवी ने कुछ साल पहले इस समस्या से निपटने का फ़ैसला किया. उन्होंने महिलाओं का एक दल बनाया और शराब भट्टियों को नष्ट करना शुरु किया. फिर उन्होंने उन पुरुषों को पकड़ना शुरु किया जो शराब पीते पाए गए. उन पुरुषों को जूतों की माला पहनाकर गाँव में घुमाया गया. धीरे-धीरे यह आंदोलन 125 मुसहर गाँवों में फैल गया. एक ग्रामीण महिला धनमति देवी ने कहा, "पहले आदमी शराब पीकर आते थे और हमारी पिटाई किया करते थे लेकिन अब गिरिजा देवी की वजह से सब कुछ बदल गया है." शराब बंदी भर नहीं लेकिन गिरिजा देवी का आंदोलन यहीं नहीं रुक गया.
उन्होंने अपने गाँव के लिए अस्पताल, स्कूल और सड़क आदि का रास्ता भी बनाया. उन्होने अपने गाँव का विकास माँगने के लिए सरकारी दफ़्तरों में ताले लगाए, रेलें रोकीं और रास्ता जाम किया. उनका प्रयास रंग भी लाया. अब उनके भिरकिया-छपौलिया गाँव में एक प्रायमरी स्कूल है, पीने के पानी की व्यवस्था कर दी गई है और 70 प्रतिशत ग्रामीणों के पास सरकारी मकान हैं. लेकिन वे संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि वे गाँव में हाईस्कूल चाहती हैं, एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और पुरुषों के लिए रोज़गार. वे ग्राम पंचायत की सदस्य भी चुनी गई हैं. बरसों से सरकारों के आश्वासन सुनते आ रहे ग्रामीणों के लिए गिरिजा देवी एक दीप स्तंभ की तरह हैं. वे चाहती हैं कि वे संयुक्त राष्ट्र के मंच से वे दुनिया भर का ध्यान अपने गाँव और समुदाय की ओर आकर्षित करें. वे एक शराब मुक्त समाज चाहती हैं और कहती हैं, "दुनिया भर में शराब पर रोक लगा देनी चाहिए क्योंकि शराब ही महिलाओं के शोषण का कारण है." इसे उनसे बेहतर और कौन बता सकता है भला. | इससे जुड़ी ख़बरें 'महिलाएँ शराब पेश कर सकती हैं'13 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस शराब विरोध से संबंधों में खटास01 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना आज भी भोगती हैं नारी होने का दंश07 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस राजस्थान में महिला सरपंचों का हाल18 नवंबर, 2004 | भारत और पड़ोस शराब पर प्रतिबंध का समर्थन08 सितंबर, 2004 | विज्ञान शराबी पतियों को सबक सिखाती महिलाएँ08 मार्च, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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